
court order
(रांची): 200 रुपए घूस लेने के मामले में न्यायालय ने 16 वर्ष बाद अभियुक्त को दोषी ठहराते हुए एक साल के कारावास और दस हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई। रांची स्थित भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी)के विशेष न्यायाधीश संतोष कुमार-द्वितीय की अदालत ने शनिवार को रांची विश्वविद्यालय के तत्कालीन सहायक रामेश्वर तिवारी को यह सजा सुनाई है।
यह था मामला
रामेश्वर तिवारी के खिलाफ पलामू जिले के डालटनगंज रेड़मा निवासी आनंतेश्वर आशुतोष की शिकायत पर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने 5 फरवरी 2002 को प्राथमिकी दर्ज की थी। अनंतेश्वर ने आरोप लगाया था कि उसके पिता जनेश्वर शुक्ला जीएलए कॉलेज डालटनगंज में रीडर के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। उनका लिव-इन कैसमेंट लेटर को आगे बढ़ाने के लिए रामेश्वर तिवारी 200 रुपए रिश्वत मांग रहे थे। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की टीम ने 6 फरवरी 2002 को रामेश्वर तिवारी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। उन्हें बाद में अदालत से जमानत मिली। विशेष लोक अभियोजक ए.के.गुप्ता ने बताया कि मामले की सुनवाई के दौरान अदालत में अभियोजन की ओर से 13 गवाह पेश हुए। जिसके बाद आज कोर्ट ने 1 साल की सजा और 10 हजार रुपए के जुर्माने का फैसला सुनाया।
मॉब लिचिंग के दोषी की करंट लगने से मौत
इधर झारखंड के रामगढ़ में मॉब लिचिंग की चर्चित घटना अलीमुद्दीन हत्याकांड मामले में दोषी सिकंदर राम की शुक्रवार को करंट लगने से मौत हो गई । रामगढ़ की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने अलीमुद्दीन हत्याकांड में सिकंदर राम को भी दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी, लेकिन पिछले दिनों उच्च न्यायालय से वह जमानत पर रिहा होकर घर पहुंचा था ।
Published on:
28 Jul 2018 07:39 pm
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