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पत्रिका एक्सक्लूसिव
रतलाम। अपने चित्रों के जरिए राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग पहचान बना चुके शहर के चित्रकार महावीर वर्मा चित्रकला अपनी कला को सहेजने के साथ नई पीढ़ी को भी आगे बढ़ाने में लगे हैं। वे नई पीढ़ी को चित्रकला की बारीकियों से परिचित करवाते हैं और उन्हें प्रोत्साहित भी करते हैं। महावीर वर्मा के चित्र एक अलग पहचान रखते हैं और उन्होंने अपनी शैली खुद विकसित की है।
कला के प्रति अपने लगाव को लेकर वे कहते हैं कि मन के भीतर एक कलाकार तो बार-बार बाहर आने के लिए बेचैन हो रहा था मगर उसे सही राह, सही वक़्त, सही माध्यम नहीं मिल पा रहा था। वे राजस्थान में रहकर जब अपनी शिक्षा पूरी कर रहे थे, उस समय से ही पोट्रेट बनाने लगे थे। बूंदी जैसे छोटे शहर में एक कलाकार के रूप में अपना स्थान तो बना ही लिया था। इसके बाद उनके ध्यान में राजस्थान के मांडने आए। उनके प्रति में अधिक आकर्षित हुआ और यहीं से उनके चित्रों को एक आकार मिलने लगा। यह समय उनके सीखने का समय था। चित्रण के इस दौर में उन्हें बार-बार यह समझ आ रहा था कि बिंबों की पुनरावृत्ति हो रही है। चित्रण में पुनरावृत्ति की संभावना होनी नहीं चाहिए, यह बात वे जानता तो थे, लेकिन काम करते हुए दिल्ली और जयपुर जैसे बड़े शहरों के चित्रकारों की तरफ जब भी ध्यान जाता, तो यह समझते कि चित्रों में परंपरा और लोक बिंबो की उपस्थिति होना चाहिए । उनका परिवेश भी लोक संस्कृति से जुड़ा था ,इसलिए इनका चित्रों में स्वाभाविक रूप से समावेश हुआ। इससे उन्हें अपनी एक अलग पहचान बनाने में बहुत सहायता मिली।
अभिव्यक्ति से आता निखार
नई पीढ़ी को वे अपनी कला से परिचित करवाते हुए कहते हैं कि यदि कलाकार के कलाकर्म में समय, संघर्ष और समाज की अभिव्यक्ति नहीं है तो उसकी कला में निखार नहीं आता है। कलाकारों की दुनिया में मैंने खुद को हमेशा सबसे आख़िरी का कलाकार माना और यही कारण रहा कि संघर्ष ने मुझे कभी परेशान नहीं किया। हर संघर्ष, हर परेशानी ने मुझे ताक़त ही दी। मैं उसी संघर्ष को अपनी प्रेरणा मानकर अपनी चित्रकला को भी इसी के सापेक्ष रचता रहा। कोई भी रचना वही कालजयी हो पाती है जो अपने अंदर अपने समय को सहेजे हुए होती है। जब भी मुझे किसी संघर्ष ने परेशान किया, मैंने उन लोगों का स्मरण किया जिन्होंने संघर्ष को ही अपनी प्रेरणा बनाया था।
वर्तमान हालात का चित्रण
विश्व के अनेक व्यक्तित्व जिनमें महान अभिनेता चार्ली चैपलिन हो या चित्रकार फ्रांसिस्को गोया ,पाब्लो पिकासो, विंसेंट वैन गॉग, एडवार्ड मुंख या भारत से चित्तप्रसाद, रवींद्रनाथ टैगोर, अमृता शेरगिल ,मकबूल फिदा हुसैन या गणेश पाइन जैसे समाज का प्रतिनिधित्व करने वाले चित्रकार हों,इन सब का निर्माण इनके समय, संघर्ष और समाज ने ही किया । इसलिए कलाकार को कभी भी संघर्षों से घबराना नहीं चाहिए, यही मैंने महसूस किया। महावीर वर्मा के बनाए चित्रों की प्रदर्शनी देश के बड़े शहरों में निरंतर आयोजित हो रही है। वे चित्रों की श्रृंखला के माध्यम से वर्तमान हालात का चित्रण भी करते हैं और अपने सांस्कृतिक और लोक वैभव को भी प्रदर्शित करते हैं।