रतलाम

#Ratlam सीवरेज योजना : 124 करोड़ का टेंडर बढ़ाकर 142 करोड़ का किया, मकान 53273 से घटाकर 43273 किए

पत्रिका ने विधानसभा में दिए जवाब के एक-एक पन्नों को जब टटोला तो पाया की राशि पाने के लिए नगर निगम ने सरकार के अलग-अलग विभाग को अलग-अलग जानकारी एक ही योजना के लिए दी गई।

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Jan 02, 2026
रतलाम में सीवरेज योजना में घोटाला

रतलाम। रतलाम सीवरेज का मामला विधानसभा में सरदारपुर के विधायक प्रताप ग्रेवाल ने उठाया, प्रश्न के उत्तर में नगरीय प्रशासन, विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने जो जानकारी दी, वो ही नगर निगम की पोल खोल रही है। पत्रिका ने विधानसभा में दिए जवाब के एक-एक पन्नों को जब टटोला तो पाया की राशि पाने के लिए नगर निगम ने सरकार के अलग-अलग विभाग को अलग-अलग जानकारी एक ही योजना के लिए दी गई।

मंत्री विजयवर्गीय ने सदन में बताया कि नगर निगम सीवरेज योजना का टेंडर 120.54 करोड़ का था जो 123.85 करोड़ का स्वीकृत हुआ। तकनीकी समिति की प्रथम प्राइस ब्रेकअप रिपोर्ट में राशि को 122.75 करोड़ किया। उसके बाद दूसरी रिवाइज्ड प्राइस ब्रेकअप शेड्यूल में राशि को बढ़ाकर 128.28 करोड़ कर दिया, लेकिन 2ं अक्टूबर 2022 को तीसरी रिवाइज प्राइस बैकअप शेड्यूल में कैपिटल कॉस्ट तथा संचालन और संधारण में बढ़त को सम्मिलित कर राशि बढ़ाकर 141.44 करोड़ कर दिया । टेंडर में दिए गए 53273 मकान में से रेलवे और औद्योगिक क्षेत्र को हटाने के बाद कुल शहरी मकान की संख्या को 43273 कर दिया। इससे ठेकेदार को टेंडर से 14.20% अधिक राशि मिली, और मकान की संख्या 10% से कमी होने का अतिरिक्त लाभ प्राप्त हुआ।

छह के बजाए दो सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट

प्रारंभिक टेंडर में सीवर की गंदगी को साफ करने के लिए 6 सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट, जो प्रत्येक प्लांट लगभग 65 लाख रुपए का था, राज्य स्तरीय तकनीकी समिति ने उन्हें घटाकर मात्र दो सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट कर दिए। जिससे ठेकेदार को लगभग ढाई करोड़ का अतिरिक्त लाभ भी प्राप्त हुआ। मंत्री ने स्वीकार किया कि रतलाम में कई स्थानों पर रहवासियों ने सीवर पाइप को तोड़कर, कनेक्शन विच्छेद कर, सीवर का पानी नाली में प्रवाहित कर दिया है।

मंत्री ने माना आयुक्त ने की गड़बड़ी

उन्होंने कहा कि सीवर कलेक्शन को पुनः यथास्थिति करने की संपूर्ण जवाबदेही भवन स्वामी की है। प्रताप ग्रेवाल ने प्रश्न किया कि यदि भवन स्वामी पुनः सीवर कनेक्शन नहीं जोड़ेगा, तो क्या पूरे रतलाम की नालियों में सीवर का गंदा पानी हमेशा बहता रहेगा? फिर इस योजना पर 200 करोड़ खर्च करने का क्या लाभ है। 141.44 करोड़ की नई लागत में 138 करोड़ की स्वीकृति केंद्र सरकार से दी गई तथा 3.44 करोड़ की बढ़ोतरी का भुगतान नगर निगम ने किया। जिसकी सहमति तत्कालीन आयुक्त ने दी। जबकि आयुक्त को इतनी बड़ी राशि की स्वीकृति महापौर परिषद से लिए बिना, स्वीकृति देने की अधिकारिता ही नहीं है । नगर निगम अधिनियम अनुसार टेंडर की राशि में वृद्धि को नगर निगम परिषद की बैठक में स्वीकृत करवाना जरूरी था।

हर विभाग को बताई अलग संख्या

मकान की संख्या 43273 क्यों की गई तो मंत्री ने सदन में बताया कि रेलवे और औद्योगिक क्षेत्र के मकान कम किए गए । जबकि नगर निगम द्वारा केंद्र सरकार को भेजी गई नगर स्वच्छता योजना तथा जल संतुलन योजना के फॉर्मेट में दिखाया गया की 2011 में नगर निगम रतलाम में 2.65 लाख आबादी, 54504 मकान थे, जो 2016 में 3.32 लाख आबादी तथा मकान की संख्या 66200 है। 2026 तक आबादी 3.55 लाख तथा मकान की संख्या 71000 हो जाएगी। जबकि केंद्र को भेजे गए एक अन्य फॉर्म में नगर निगम ने बताया की रतलाम में 2025-26 तक की स्थिति में 77467 मकान है जिसमें से 14536 स्लम एरिया के मकान है। जिसमें से 43653 मकान को सीवर कनेक्शन की सुविधा दी गई है और 33814 मकान अभी इस सुविधा से वंचित है।

आंकड़े घोटाले की पोल खोल रहे

सारे आंकड़े इस योजना में डेढ़ सौ करोड़ के घोटाले की पोल खोल रहे हैं । जब 53237 मकान थे तब उसे घटाकर 43273 कर दिया गया और सदन में कहा गया कि शहर में इतने ही मकान है। शेष मकान रेलवे और औद्योगिक क्षेत्र है, जबकि अमृत योजना दो में प्रस्तावित 80 करोड़ की राशि स्वीकृत करवाने के लिए इन्हीं मकान की संख्या बढ़ाकर 77469 बताई गई और यह कहा गया की 33814 मकान को सीवर सुविधा देना है।

- प्रताप ग्रेवाल, विधायक, सरदारपुर

निगम सतर्क रहते हुए कार्रवाई करें

इंदौर शहर में सीवरेज लाइन का दूषित पानी पेयजल की पाइपलाइन में मिल जाने की अत्यंत गंभीर घटना सामने आई है। इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना बाद जिला प्रशासन एवं नगर निगम को सतर्क रहते हुए तत्काल और प्रभावी कार्रवाई करना चाहिए।पूर्व में भी चौमुखीपूल, घास बाजार, खेरातीवास एवं पैलेस रोड जैसे क्षेत्रों से दूषित पानी की आपूर्ति की शिकायतें प्राप्त हुई थीं। उस समय मैं स्वयं नागरिकों के साथ नगर निगम कार्यालय गया था और नगर निगम आयुक्त को शिकायत दर्ज कर तत्काल कार्रवाई का आग्रह किया था, इसके बावजूद व्यवस्था सुधारने में लगभग 15 दिन का समय लग गया था।

- हिम्मत कोठारी, पूर्व मंत्री, रतलाम

अब याद नहीं इतना पुराना

2022 में क्या टेंडर किए, अब इतना पुराना याद नहीं है। मंत्री ने जो सदन में बोला, वो ही सही होगा। सीवरेज का पानी पेयजल में मिल रहा है तो इसमें तुरंत सुधार के लिए लीकेज की जांच होना चाहिए।

- सोमनाथ झारिया, पूर्व आयुक्त, नगर निगम

Published on:
02 Jan 2026 11:25 pm
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