टाइगर मॉस्किटो शहरवासियों को पहुंचा रहा अस्पताल
पिछले सालों के मुकाबले बहुत कम सामने आ रही है मलेरिया पीडि़तों की संख्या, १० माह में १०० का आंकड़ा भी नहीं हुआ पार
रतलाम। मलेरिया, डेंगू या ऐसी ही अन्य बीमारियों के लिए जिम्मेदार मच्छरों में इस समय सबसे ज्यादा किसी मच्छर ने परेशान कर रखा है या यूं कहे कि शहर को जकड़ दिया है तो वह डेंगू का टाइगर मच्छर है। महज १४ से २१ दिन की आयु वाले इस टाइगर मच्छर ने अब तक शहर में जिस तरह से डेंगू के पीडि़तों का आंकड़़ा अर्धशतक के पार पहुंचा दिया। इसी बात से समझा जा सकता है कि यह कितना खतरनाक है। यह तो गनीमत है कि मलेरिया का प्रकोप इस बार बहुत ही कम या यूं कहे कि नगण्य है वरना क्या हालात होते यह समझा जा सकता है।
मलेरिया के लिए१४७ गांव थे चिह्नित
मलेरिया विभाग ने मलेरिया के हिसाब से रतलाम, सैलाना, बाजना और पिपलौदा के कुछ हिस्से को मिलाकर १४७ गांवों को विशेष रूप से चिह्नित कर रखा था। यह आशंका पिछले सालों में सामने आए आंकड़ों के आधार पर तय थी, लेकिन इस बार बहुत कम मरीज पाजीटिव मिले हैं। इस साल के जनवरी माह से लेकर अक्टूबर माह तक करीब १० महीनों में मलेरिया की १६ हजार से ज्यादा सलाइडें मलेरिया विभाग ने बनाई है जिसमें से मलेरिया पाजीटिव मरीजों की संख्या १०० का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाया है।
महज १४ से २१ दिन की आयु
मलेरिया मच्छरों की बात करने की बजाय इस समय हम डेंगू के मच्छरों की बात करे तो इसकी आयु महज १४ से २१ दिन की होती है। सात दिन में लार्वा बनकर तैयार होता है और १४वें दिन वह मच्छर बनकर उडऩे को तैयार हो जाता है। सीएमएचओ कार्यालय के एपिडिमियोलॉजिस्ट डॉ. प्रमोद के अनुसार इस मच्छर को टाइगर मास्किटो कहा जाता है। इसकी आयु मात्र २१ दिन होती है। इसी अवधि में यह अपना काम पूरा कर देता है और जिसे काटता है उसे डेंगू नामक बीमारी से पीडि़त कर देता है।
बहुत आरामी होता है टाइगर मास्किटो
डॉ. प्रमोद के अनुसार टाइगर मच्छर बहुत आरामी होता है। यह सुबह और शाम को ही काटता है। यानि यह मच्छर रात में नहीं काटता है। शेष समय अंधेरे या नमी वाले स्थान पर छिपकर बैठता है। साफ पानी जो सात से आठ दिन तक भरा रहता है उसमें इसका लार्वा पनपता है। यह लार्वा ४५ डिग्री के एंगल पर पानी में तैरता है। व्यक्ति को काटने के दौरान भी ४५ डिग्री के एंगल पर ही बैठकर काटता है। पानी में लार्वा होने पर खाद्य तेल डाल दिया जाए तो उसकी आक्सीजन सप्लाई बंद होने से यह मच्छर दम तोड़ देता है।
टाइगर मच्छर की पहचान
डॉ. प्रमोद बताते हैं कि टाइगर मच्छर आमतौर पर दूसरे मच्छरों से साइज में बड़ा होता है। इसके पंख और पैरों पर सफेद और काले रंग की धारियां बनी होती है। पैरों में भी थोड़ा से रंग लगा हुआ जैसा होता है जिससे इसे पहचाना जा सकता है। मलेरिया फैलाने वाला मच्छर हल्के भूरे रंग का होता है। टाइगर मच्छर ४०० मीटर के दायरे में ही उड़ सकता है। इसकी फ्लाइंग क्षमता इससे ज्यादा नहीं है। डेंगू के लिए जिम्मेदार इस टाइगर मच्छर को एडिज एजेप्टी नाम दिया गया है। इस मच्चर के काटने से आठ से दस दिन में डेंगू के लक्षण सामने आते हैं।
मलेरिया की स्थिति जिले में (२०१८)
माह ----------------- सलाइडें बनाई गई ------------- पाजीटिव मिले मरीज
जनवरी -------------------- २१३३ --------------------- ०२
फरवरी --------------------- २१०७ -------------------- ००
मार्च ---------------------- १९२७ --------------------- ०१
अप्रैल --------------------- १३०२ --------------------- ०२
मई ----------------------- १४५१ --------------------- १०
जून ----------------------- १०६१ --------------------- १६
जुलाई --------------------- १६६१ --------------------- २६
अगस्त --------------------- १७१९ --------------------- १५
सितंंबर --------------------- २७८० --------------------- २३
अक्टूबर अब तक -------------२५६७ --------------------- १६
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२१ दिन की होती है आयु
डेंगू बीमारी फैलाने वाले एडिज एडिप्टी मच्छर को टाइगर मास्किटो भी कहते हैं। इसके पंख और पैरों में सफदे और काली धारियां होती है। इसलिए इसे टाइगर मच्छर कहते हैं। इसकी आयु मात्र १४ से २१ दिन की होती है। इस छोटे से जीवन काल में यह डेंगू जैसी गंभीर बीमारी फैलाकर चला जाता है। मच्छर से बचाव ही इसका सबसे बड़ा उपाय है।
डॉ. प्रमोद, एपिडिमियोलॉजिस्ट, सीएमएचओ कार्यालय
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मलेरिया रोगियों की संख्या कम
इस बार मलेरिया रोगियों की संख्या पिछले साल के मुकाबले ५० फीसदी भी नहीं है। यह अच्छी बात है क्योंकि डेंगू और मलेरिया एक साथ फैलता तो मुश्किल होती और मरीजों की संख्या काफी ज्यादा हो जाती। हम मलेरिया और डेंगू के मच्छरों से बचाव के लिए लगातार फागिंग करवा रहे हैं।
दौलत पटेल, जिला मलेरिया अधिकारी