देखें वीडियो.. कैसे दो मासूम व उनकी मां की लाश को रौंदते हुए निकलती रही ट्रेन, पुलिस खड़ी-खड़ी देखती रही तमाशा
रतलाम। ये सिर्फ भारतीय रेलवे में हो सकता है कि पटरी पर लाश पड़ी हो व ट्रेन उसको रोंदकर निकल जाए। लाश भी एक या दो न पूरी तीन। डेढ़ साल का मासूम, मासूम की तीन वर्ष की उम्र की बहन व इन दोनों मासूमों की मां के शव को रोंदकर एक या दो नहीं, बल्कि पूरी 14 मालगाड़ी व चार से अधिक यात्री ट्रेनें निकलती रही। हैरानी की बात ये रही कि ये सब पुलिस की उपस्थिति में हुआ। हम बात कर रहे है भारतीय रेलवे के अंतर्गत आने वाले पश्चिम रेलवे के रताम मंडल की। यहां पर रतलाम-चित्तौडग़ढ़ सेक्शन में बुधवार को मंदसौर से नीमच के बीच एेसा ही कुछ हुआ।
मल्हारगढ़ रेलवे स्टेशन के आउटर पर मंगलवार-बुधवार को हुई हदयविदारक घटना ने रेलवे के सुरक्षातंत्र व रनिंग कर्मचारियों की असंवेदनशीलता को उजागर कर दिया है। रात 11 बजे से सुबह 11 बजे तक मंदसौर-नीमच सेक्शन में १४ मालगाड़ी व चार से अधिक यात्री ट्रेन निकली, लेकिन किसी भी चालक को ये शव नजर न आए। इतना ही नहीं, इस सेक्शन में आरपीएफ से लेकर रेलवे के ट्रैकमैन व गैंगमैन रात में पटरियों की सुरक्षा का दावा करते है, इनको भी ये शव न दिखे। अब अधिकारियों का कहना है कि ये शव कही और से लाकर रखे गए।
पहले समझे रनिंग के नियम को
ट्रेन चाहे मालगाड़ी हो या यात्री ट्रेन, रेलवे के रनिंग नियम के अनुसार अगर कोई मवेशी या व्यक्ति की टक्कर होती है तो ट्रेन को रोकना अनिवार्य है। इतना ही नहीं, अगर पटरी किनारे या पटरी पर कुछ एेसा दिखे जो सुरक्षा के लिए खतरा हो तो तुरंत इसकी सूचना रेलवे नियंत्रण कक्ष में दी जाती है। इन सब नियम के विपरीत मल्हारगढ़ के मामले में हुआ। रात ११ बजे से सुबह ११ बजे तक अनेक मालगाड़ी व यात्री ट्रेनें निकली, लेकिन किसी ने शव न देखे, ये अजीब ही है।
ये कह रहे अब जिम्मेदार
रनिंग विभाग के जिम्मेदारों का तो कहना है कि किसी ट्रेन से कोई हादसा हुआ या ही नहीं। ये शव कही और से लाकर पटरी किनारे रखे गए। क्षतविक्षत शव ट्रेन से न हुए। एेसा होता तो सूचना मिलती। रेलवे को पहली सूचना ही सुबह 10 बजे बाद गेटमैन से मिली है। रेलवे की माने तो सवाल यही है कि फिर शव किसने व कब रखे।
हमारे चालक दोषी नहीं
शव कही और से लाकर रखे गए। हमारे चालक दोषी नहीं है। हमारे पास शव होने की सूचना ही सुबह आई तो रात में इन पर से ट्रेन निकलने की बात ही गलत है। हमारे चालक एेसा नहीं करते है।
- पवन कुमार सिंह, वरिष्ठ मंडल परिचालन प्रबंधक