
रतलाम। प्रदेश के महाविद्यालयों में विद्यार्थियों को सौगात बताकर बांटे गए स्मार्ट फोन को घटिया करार देने की शिकायत की गूंज बुधवार को प्रदेश केबिनेट की बैठक में भी सुनाई दी। शिक्षामंत्री ने माना कि विद्यार्थियों को घटिया फोन दिए गए हैं। इस पूरे मामले को करीब डेढ़ माह पहले रतलाम के पूर्व महापौर पारस सकलेचा ने उठाते हुए आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो को भोपाल में शिकायत की थी। इसके बाद मामला सुर्खियों में आया था।
रतलाम सहित प्रदेशभर के महाविद्यालयों में प्रथम वर्ष वाले विद्यार्थियों को मिले स्मार्ट फोन पर सरकार को गंभीर होना पड़ा है। अक्टूबर माह मेंं रतलाम के पूर्व महापौर पारस सकलेचा ने दस्तावेजों के आधार पर आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) को शिकायत कर घपले की आशंका जताई थी। सकलेचा ने शिकायत में स्मार्ट फोन को घटिया करार देकर कंपनी पर भी टेंडर शर्तो का पालन नहीं करने के आरोप लगाए थे।
कंपनी का अता-पता नहीं, न सेंटर न रिपेयर
शिकायत में बताया गया कि प्रदेश में स्मार्ट फोन के लिए अनुबंधित कंपनी ने कहीं भी अपने सेंंटर नहीं खोले है। न तो इनको रिपेयर ही करने की कोई व्यवस्था है। ऐसे में विद्यार्थी मिलने वाले स्मार्ट फोन का लाभ नहीं ले पा रहे है। फोन में फीचर से लेकर नेटवर्क तक को लेकर कुछ भी स्पष्ट नहीं है, कई फोन तो वितरण के बाद बंद हो गए। शिक्षामंत्री ने माना कि विद्यार्थियों को घटिया फोन दिए गए हैं। इस पूरे मामले को करीब डेढ़ माह पहले रतलाम के पूर्व महापौर पारस सकलेचा ने उठाते हुए आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो को भोपाल में शिकायत की थी। इसके बाद मामला सुर्खियों में आया था।
80 करोड़ से ज्यादा का घपला
प्रदेश में एक फर्जी कंपनी के माध्यम से विद्यार्थियों को स्मार्ट फोन बांटे गए है। इसमें करीब 80 करोड़ रुपए का घपला किया गया है। स्मार्ट फोन बेहद घटिया है और कंपनी का कहीं कोई व्यावसायिक रिकॉर्ड भी स्पष्ट नहीं है। मामले में शिकायत के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय ने भी दस्तावेज और अन्य तथ्य मांगे थे, जो सरकार को उपलब्ध कराएं है।
- पारस सकलेचा, पूर्व महापौर रतलाम