रतलाम

मेले में बिजली दरों का झमेला, दुकानदार उतरे विरोध में

कालिका माता मंदिर परिसर में लग रहे नवरात्र मेले में इस साल विद्युत शुल्क पिछले साल के मुकाबले दो से तीन गुना करने पर व्यापारी बिफर गए। आंबेडकर मांगलिक भवन मैदान के दुकानदार विरोध में उतर आए, बाद में दरें कम करने पर मामले का पटाक्षेप हुआ
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Oct 16, 2026
ratlam news
विरोध जताते हुए दुकानदार

रतलाम. कालिका माता मेले में आंबेडकर मांगलिक भवन और मैदान क्षेत्र में लगी दुकानों के बिजली दरों को लेकर शुक्रवार को बड़ा खेल सामने आया है। पिछले साल के मुकाबले इस साल बिजली ठेकेदार ने तीन गुना ज्यादा दरें करके वसूली शुरू की तो दुकानदार विरोध में उतर आए। शुक्रवार की शाम को ज्यादातर दुकानदारों ने विरोध में अपनी दुकानें ही नहीं खोली। मेला देखने और खरीदारी करने आने वाले शहरवासी खाली हाथ ही निराश लौटने लगे। सभी दुकानदार एकजुट रहे तो आखिर में अफसरों ने एकमुश्त राशि देने पर पिछले साल से 100 रुपए बढ़ाकर 850 रुपए देने की सहमति निगम से मिलने के बाद दुकानदारों ने रात करीब सात बजे बाद अपनी-अपनी दुकानें खोली और आठ बजे तक मेला शुरू हो पाया।

मिलीभगत का खेल संभव

पिछले साल एकमुश्त 15 दिन की बिजली के 750 रुपए तय किए और इतनी ही राशि भी ली गई। इस बार ठेकेदार और अफसरों ने मिलीभगत करके कुछ ऐसी लाइटों के दाम कम कर दिए जिनका उपयोग ही नहीं होता है, जबकि हर दुकान में उपयोग होने वाली लाइटों के दाम करीब दो गुना बढ़ा दिए। इससे पूरे मेले के दौरान एक दुकानदार को कम से कम 2100 रुपए का बोझ आ गया जबकि पिछले साल 750 रुपए ही थे।

बोल नहीं पाए अफसर

दुकानदारों के विरोध और दुकानें बंद होने की जानकारी निगम के अफसरों को लगी तो भी निगम के प्रकाश विभाग के अफसर पहुंचे। मामला ज्यादा बढ़ा तो बिजली के ठेकेदार ने दुकानदारों को धमकाने के अंदाज कहने लगा कि दरें तो यही रहेगी। आप लोगों को जो करना हो कर लो। हालात यह हुई कि निगम के प्रकाश विभाग के अफसर उसके सामने कुछ बोल ही नहीं पाए। वे ठेकेदार का ही पक्ष लेते नजर आए।

कमाने की बजाय यहीं भर देंगे

दुकानदारों का कहना है कि इतना भारी भरकम बिजली का बिल बनाया जाएगा तो हम यहां कमाने की बजाय अपनी जेब से भरकर जाएंगे। दुकानदारों के अनुसार प्लाट के अलग, बिजली के अलग, परिवार के साथ इतने दिनों तक यहां रहना सब खर्चे होते हैं। इतना क्या कमा लेंगे कि सभी राशि भरने के बाद कुछ बच पाएगा। ऐसे तो यह मेला करना ही बेकार हो जाएगा। जैस-तैसे मेला करके परिवार चला रहे हैं।

Updated on:
16 Oct 2026 10:06 pm
Published on:
16 Oct 2026 10:06 pm