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रतलाम मेडिकल कॉलेज में दवाओं का टोटा, हर दूसरे-तीसरे पर्चे पर गोला

हॉल में दवाइयों के नाम पर कटौती, सामान्य एसिडिटी से लेकर एलर्जी की दवाएं भी उपलब्ध नहीं, आधा कॉम्बिनेशन देकर बाकी बाहर से लाने को कह रहे, मरीजों को निजी स्टोरी पर करना पड़ रही जेब खाली
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Ratlam Medical College medicines news

हॉल में दवाइयों के नाम पर कटौती, सामान्य एसिडिटी से लेकर एलर्जी की दवाएं भी उपलब्ध नहीं, आधा कॉम्बिनेशन देकर बाकी बाहर से लाने को कह रहे, मरीजों को निजी स्टोरी पर करना पड़ रही जेब खाली

रतलाम। मेडिकल कॉलेज में दवा वितरण काउंटर पर हर दूसरे-तीसरे पर्चे पर गोला लगाकर मरीजों को कुछ दवाइयां बाहर से खरीदने के लिए कहा जा रहा है, उपचार के लिए पहुंच रहे मरीजों को पर्चे पर लिखी दवाइयां पूरी नहीं मिल पा रही हैं। हालात यह हैं कि एसिडिटी, एलर्जी और नसों के दर्द में इस्तेमाल होने वाली सामान्य दवाइयां तक उपलब्ध नहीं होने से मरीजों की परेशानी बढ़ रही है। मेडिकल कॉलेज सरकारी अस्पताल में उपचार की उम्मीद लेकर आने वाले मरीजों को दवाओं के लिए जेब ढीली करनी पड़ रही है।

दवा वितरण के दौरान मरीजों से कहा जा रहा है कि जो दवाइयां यहां उपलब्ध हैं, वे ले लें और बाकी बाहर से खरीद लें। मरीजों का आरोप है कि एसिडिटी में उपयोग होने वाली पेंटाप और रैनिटिडीन जैसी दवाओं के लिए भी मरीजों को बाहर भेज रहे हैं। वहीं, नसों के दर्द के लिए लिखे गए मिथाइल कोबालामिन और प्रेगाबालिन के कॉम्बिनेशन में एक दवा देकर दूसरी बाहर से लाने को कहा जा रहा है।

कम कीमत वाली दवाइयां तक नहीं मिल रही
इसी तरह एलर्जी में उपयोग होने वाले लेवोसेटिरिजिन और मोंटेलुकास्ट के कॉम्बिनेशन की दवाइयां भी मरीजों को उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। त्वचा की नमी बनाए रखने के लिए इस्तेमाल होने वाला मॉइस्चराइजिंग लोशन तक नहीं मिलने की बात सामने आई है। कॉम्बिनेशन वाली दवाओं में एक दवा मिलने और दूसरी नहीं मिलने से मरीजों को पूरा उपचार लेने के लिए अलग से खर्च करना पड़ता है। सवाल यह है कि जब मेडिकल कॉलेज में मरीजों को सामान्य और कम कीमत वाली दवाइयां तक नहीं मिल रही हैं, तो नि:शुल्क उपचार की व्यवस्था का लाभ उन्हें कैसे मिलेगा।

सरकारी काउंटर पर दवा नहीं, मरीजों पर अतिरिक्त खर्च
मेडिकल कॉलेज में दवा वितरण व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। पर्चे पर लिखी दवाओं में से कुछ उपलब्ध कराकर बाकी बाहर से लाने के लिए कहा जाना मरीजों की परेशानी बढ़ा रहा है। खासकर आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए अतिरिक्त खर्च उठाना मुश्किल हो सकता है। एसिडिटी, एलर्जी और नसों के दर्द जैसी सामान्य समस्याओं में लिखी जाने वाली दवाओं भी उपलब्ध नहीं हैं। यह बात अलग है कि इसके बावजूद मेडिकल कॉलेज में बैठे चिकित्सक इन दवाईयों को लिख रहे हैं। मरीजों की परेशानी झेलना पड़ रही हैं।

हमेशा अधूरी दवाई देते हैं
जवाहर नगर निवासी ओमप्रकाश दया ने बताया कि पर्चे में गोले लगा देते हैं, कहते है कि बाकि गोलियां बाहर मिलेगी। दवाई पूरी नहीं देते हैं। पेंटाप गोली तो पिछली बार भी नहीं दी थी।

पर्चे पर गोले बना दिए, बाहर से ले लेना
सैलाना निवासी विशाल मईड़ा ने बताया कि पर्चे पर गोले लगा दिए और कहा कि बाहर से लेना, रात में दो इंजेक्शन भी बाहर से ही मंगवाए थे। आधी गोली यहां से मिलती बाकि बाहर की लिख रहे हैं।

एलर्जी की दवाई भी पूरी नहीं दी
ईश्वर नगर निवासी गोवर्धन ने बताया कि हाथ-पैर में एलर्जी हो रही हैं, इसकी भी पूरी दवाई नहीं दी। पर्चे पर गोला लगाकर कहा कि बाहर से ले लेना यहां नहीं हैं। आयुष्मान कार्ड लगा है फिर भी परेशान हैं।