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सर्वे का काम शुरू होने से पहले ही बजट के अभाव में रुका

मेडिकल कॉलेज को रावत भाटा न्यूक्लियर पॉवर प्लांट के पहले चार जिलों के सर्वे की अनुमति मिली है। इसका एमओयू भी मेडिकल कॉलेज के साथ हो चुका किंतु सर्वे के लिए पहली किस्त ही नहीं मिल पाई है।
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रतलाम

•

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Kamal Singh

•

Oct 16, 2026

ratlam nwes

medical collage


रतलाम. डॉ. लक्ष्मीनारायण पांडे मेडिकल कॉलेज को बांसवाड़ान्यूल्कियर पॉवर प्लांट से पहले सर्वे का बड़ा काम मिला और इसे सफलता से पूरा करने के बाद कोटा-रावत भाटा (आरआर साइट) के न्यूक्लियर पॉवर प्लांट के सर्वे का जिम्मा भी मिल चुका है। पिछले महीने पॉवर प्लांट के साइट डायरेक्टर और मेडिकल कॉलेज के बीच एमओयू भी हो चुका है। यहां तक तो ठीक किंतु सर्वे करने के लिए प्रारंंभिक रूप से मेडिकल कॉलेज को अभी किसी तरह का बजट नहीं मिलने से काम शुरू नहीं हो पाया है। अलबत्ता मेडिकल कॉलेज की टीम ने सर्वे के लिए अपने स्तर पर तैयारियां कर ली है। दीगर बात यह है कि सर्वे का कार्य 12 से 18 माह की अवधि में पूरा करके देना है।

10 कॉलेजों में से रतलाम का चयन

देश के सबसे पुराने एवं प्रतिष्ठित रावत भाटा न्यूक्लियर पावर प्लांट (आरआर साइट) राजस्थान ने मध्यप्रदेश एवं राजस्थान के दस से अधिक चिकित्सा महाविद्यालयों से अनुसंधान प्रस्ताव आमंत्रित किए थे। कठोर चयन प्रक्रिया के उपरांत मेडिकल कॉलेज रतलाम का चयन सर्वे के लिए किया था। बांसवाड़ा के न्यूक्लियर साइटड का सर्वे करने के बाद मेडिकल कॉलेज रतलाम को यह दूसरा बड़ा न्यूक्लियर पॉवर प्लांट का प्रोजेक्ट मिला है।

30 किमी दायरे में होगा सर्वे

रावतभाटा न्यूक्लियर पावर प्लांट के 30 किलोमीटर के दायरे में रहने वाली आबादी पर व्यापक डाइटरी सर्वे इस एमओयू के तहत किया जाएगा। इसमें राजस्थान के दो जिले चित्तोडग़ढ़, कोटा तथा मध्यप्रदेश के दो जिले मंदसौर व नीमच भी कवर हो रहे हैं। इसके माध्यम से स्थानीय लोगों के भोजन उपभोग पैटर्न, पोषण स्तर तथा खाद्य पदार्थों के उपभोग की वैज्ञानिक जानकारी एकत्रित करने से न्यूक्लियर के प्रभावों का सटीक वैज्ञानिक आकलन किया जा सके।

इस तरह होगा यह सर्वे

रावत भाटा न्यूक्लियर पॉवर प्लांट के 30 किमी दायरे में होने वाले सर्वेक्षण में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त 24 घंटे की डाइटरी रिकॉल पद्धति का उपयोग किया जाएगा। इसके माध्यम से इस क्षेत्र में रहने वाले परिवारों के भोजन, पेयजल, दूध एवं दुग्ध उत्पाद, अनाज, दालें, फल, सब्जियां तथा अन्य खाद्य पदार्थों के दैनिक उपभोग का विस्तृत विवरण संकलित किया जाएगा। अध्ययन में शिशुओं से लेकर वयस्कों तक सभी आयु वर्गों को शामिल किया जाएगा।

बांसवाड़ा परियोजना बड़ी जिम्मेदारी

इससे पूर्व भी मेडिकल कॉलेज ने वर्ष 2024 में बांसवाड़ा न्यूक्लियर साइट के लिए इसी प्रकार की राष्ट्रीय महत्व की परियोजना का सर्वे किया जा चुका है। सर्वे का प्रोजेक्ट मेडिकल कॉलेज के कम्युनिटी मेडिसीन विभाग को मिला है। यह कार्य भी सफलता से पूरा होता है तो रतलाम मेडिकल कॉलेज का नाम देश के चुनिंदा मेडिकल कॉलेजों में शुमार हो सकता है। इससे मेडिकल कॉलेज के वैज्ञानिक शोध, गुणवत्तापूर्ण कार्य एवं विशेषज्ञता सामने आ सकेगी।

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अभी बजट नहीं आया

सर्वे के लिए अभी बजट नहीं आया है। संभवत: उनकी प्रक्रिया चल रही है। एक कन्फर्मेशन लेटर जरुर मिला है। हो सकता है आगामी दिनों में बजट रिलीज हो जाए।

डॉ. अनिता मुथा, डीन, मेडिकल कॉलेज