
रतलाम. मानसूनी रिमझिम बारिश में फसल लहलहा रही हैं, कहीं-कहीं मक्का-कपास में हालांकि, कहीं-कहीं मक्का में आंशिक रूप से फाल आर्मी वर्म और कपास में रसचूसक कीटों का प्रकोप दिख रहा है। कृषि अधिकारियों ने क्षेत्रों का निरीक्षण कर किसानों को कीट नियंत्रण के लिए उचित सलाह दी हैं।
विकासखंड बाजना में उप संचालक कृषि बीएस अर्गल ने खेतों का भ्रमण किया। उन्होंने यह भी कहा कि कीट व्याधि का प्रकोप होने पर कृषि विभाग के मैदानी अमले या कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों से सलाह लेकर ही सिफारिश के अनुसार कीटनाशकों का उपयोग करें। इस दौरान पीडी आत्मा निर्भयसिंह नर्गेश और सहायक संचालक कृषि भीका वास्के भी उपस्थित थे।
किसान ये करें उपाय
डीडीए अर्गल ने बताया कि कपास, मक्का, सोयाबीन सहित अन्य फसलों की स्थिति अच्छी है। हालांकि, कहीं-कहीं मक्का में आंशिक रूप से फाल आर्मी वर्म और कपास में रसचूसक कीटों का प्रकोप दिख रहा है। इनके नियंत्रण के लिए मक्का में इमामेक्टीन बेंजोएट 80-100 ग्राम और कपास में एमिडाक्लोप्रिड 17.8 प्रतिशत एसएल की 80 एमएल मात्रा का प्रति एकड़ 150-200 लीटर पानी में घोल बनाकर छिडक़ाव करने की सलाह दी गई है।
धोलावाड़ डेम में 19.78 मिलियन घन मीटर जल भराव
सावन माह में हुई अच्छी मानसूनी बारिश से किसानों और आमजन के चेहरे पर मुस्कान है। वातावरण में ठंडक घुलने के साथ जिले में औसत वर्षा का आंकड़ा 18 इंच के पार हो गया है। हालांकि, गत वर्ष इस अवधि में 22 इंच बारिश हुई थी। धोलावाड़ डेम में 49.95 मिलियन घन मीटर की क्षमता के मुकाबले वर्तमान में 19.78 मिलियन घन मीटर जल भराव हुआ है। इसके बावजूद, क्षेत्र में फसलें लहलहा रही हैं।
कलेक्टर सेतूतपाड़ा में पौधरोपण का किया निरीक्षण
कलेक्टर अजय कटेसरिया ने ग्राम रानीसिंह स्थित सेतूतपाड़ा में मनरेगा के अन्तर्गत किए जा रहे पौधरोपण कार्य का निरीक्षण किया। सिंचाई तालाब के समीप ग्राम पंचायत रानीसिंह के सेतूतपाड़ा में मियावाकी पद्धति से लगभग 10 हजार पौधे लगाए जा रहे हैं। पौधरोपण कार्य का स्थल निरीक्षण करते हुए कार्य की प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने पौधों की सुरक्षा, नियमित सिंचाई एवं देखरेख की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि लगाए गए पौधों का बेहतर संरक्षण हो सके और क्षेत्र में हरित आवरण विकसित किया जा सके।
नियमित निगरानी रखने का निर्देश
पौधारोपण का यह कार्य कुल 3 हेक्टेयर क्षेत्र में किया जा रहा है। कार्य के लिए 24.99 लाख रुपए की राशि स्वीकृत की गई है। मियावाकी पद्धति से विकसित किए जा रहे इस क्षेत्र का उद्देश्य कम स्थान में अधिक पौधों का रोपण कर सघन हरित क्षेत्र तैयार करना है। कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि पौधारोपण के साथ-साथ पौधों के संरक्षण और उनकी नियमित निगरानी पर भी विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा कि लगाए गए पौधों का जीवित रहना और उनका संरक्षण ही पौधारोपण अभियान की वास्तविक सफलता है। निरीक्षण में सीईओ जिला पंचायत सुश्री वैशाली जैन, सैलाना एसडीएम श्री जायसवाल सहित संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।