रतलाम. गुप्त नवरात्र के प्रथम दिन शहर के दीनदयाल नगर में पहली बार 51 कुंडीय शिवशक्ति हनुमत महायज्ञ की शुरुआत के साथ ही संतों की पेशवाई से वातावरण भक्तिमय बन गया। सैकड़ों महिलाओं ने सिर पर मंगलकलश धारण किए, पुरुष श्वेत-पीले वस्त्र धारण कर भगवा ध्वज हाथों में लिए शामिल हुए। गुप्त नवरात्र के प्रथम […]
रतलाम. गुप्त नवरात्र के प्रथम दिन शहर के दीनदयाल नगर में पहली बार 51 कुंडीय शिवशक्ति हनुमत महायज्ञ की शुरुआत के साथ ही संतों की पेशवाई से वातावरण भक्तिमय बन गया। सैकड़ों महिलाओं ने सिर पर मंगलकलश धारण किए, पुरुष श्वेत-पीले वस्त्र धारण कर भगवा ध्वज हाथों में लिए शामिल हुए।
गुप्त नवरात्र के प्रथम दिन से शहर पहली बार दीनदयाल नगर में 51 कुंडीय शिवशक्ति हनुमत महायज्ञ की शुरुआत हुई। वैदिक पद्धतिनुसार संत-यज्ञाचार्यो के सान्निध्य में यजमानों ने हवन कुंड में अग्निप्रवेश कर आहुतियां प्रदान की। यज्ञ के पूर्व शहर के माणकचक स्थित गोपालजी का बड़ा मंदिर से भक्तिमय वातावरण में अडवानिया वाले गुरुदेव आनंद गिरी के सान्निध्य में संतों की पेशवाई हुई।
गूंजे शिव-शक्ति हनुमत के जय जयकार
शिव-शक्ति-हनुमत की जय जयकारों के साथ सैकड़ों की संख्या में मातृशक्ति ने मंगल कलश सिर पर धारण किया। बैंडबाजों के साथ भक्तिमय गीतों की स्वरलहरियों के संग धर्मालु घास बाजार, चांदनीचौक, लक्कड़पीठा होते हुए महायज्ञ स्थल दीनदयाल नगर पहुंचे। यज्ञ विश्राम अवसर पर बड़ी संख्या में भक्तों ने संकीर्तन करते हुए परिक्रमा का लाभ लिया।
मातृशक्ति ने उठाए मंगल कलश
भगवा ध्वज लहराते हुए, मातृशक्ति लाल चुनरी धारण कर कलश यात्रा में शामिल हुई। पेशवाई के दौरान संत बग्गी में विराजमान थे, मातृशक्ति कलश उठाए जिन मार्गो से निकले, पुष्पों से वर्षा कर शहर में अनेक स्थानों पर सामाजिक संस्था संगठनों के पदाधिकारियों ने स्वागत किया।
यात्रा में प्रमुख रूप से रहे शामिल
पेशवाई के दौरान अखंडज्ञान आश्रम के स्वामी देवस्वरूपानंद,काजल गुरू जागीरदार, संत शिवानंद, योगी योगीनाथ, राज राजेश्वरी देवी, महंत नरेंद्र गिरी, संत सुजाना नंद और महायज्ञ में आहुतियां दिलवाने वाले विप्र जन बड़ी संख्या में शामिल हुए।