
रतलाम. द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश आशीष श्रीवास्तव के न्यायालय ने महत्वपूर्ण निर्णय पारित करते हुए फर्जी और कूटरचित दस्तावेज बनाकर बैंक से पत्तल-दोने का लोन लेने वाले आरोपी जाकिर हुसैन को धारा 420, 467, 468, 471 एवं 120-बी भादसं में दोषसिद्धि पाए जाने पर आरोपी जाकिर हुसैन पिता मोहम्मद हुसैन, (55) निवासी 63 पीएनटी कॉलोनी, रतलाम को भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468, 471 एवं 120-बी के अपराधों में दोषसिद्ध किया गया है। अभियोजन की ओर से अपर लोक अभियोजक संजीव सिंह चौहान ने पैरवी की। अपराध की पूरी कहानी प्रकरण की अभियोजन कहानी के अनुसार आरोपी जाकिर हुसैन ने अपनी पुत्री एवं सह-आरोपी ऐहतेशाम बानो के साथ मिलकर प्रधानमंत्री रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत दौना-पत्तल निर्माण इकाई स्थापित करने के नाम पर बैंक से ऋण प्राप्त करने की योजना बनाई। आरोपियों ने जिला उद्योग केन्द्र, रतलाम के माध्यम से ऋण के लिए आवेदन प्रस्तुत किया गया। बैंक ने आवश्यक प्रक्रिया एवं निरीक्षण के पश्चात 25 लाख की मांग के स्थान पर 17 लाख का ऋण स्वीकृत किया गया। मशीनरी खरीदने के नाम पर निक्की ट्रेडर्स, इंडस्ट्रियल एरिया, साँवेर रोड, इंदौर के नाम से कोटेशन प्रस्तुत किया गया।
बताए पते पर नहीं थी फर्म जांच में सामने आया कि जिस निक्की ट्रेडर्स के नाम से मशीनरी का कोटेशन प्रस्तुत किया गया था, उस नाम की फर्म बताए गए पते पर वास्तविक रूप से अस्तित्व में ही नहीं थी। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ से प्राप्त शिकायत की जांच के दौरान औद्योगिक क्षेत्र, साँवेर रोड, इंदौर में भौतिक सत्यापन कराया गया। जांच में संबंधित पते पर निक्की ट्रेडर्स नाम की कोई फर्म नहीं मिली। वहां दूसरी कंपनी का संचालन पाया गया और आसपास के क्षेत्र में भी उक्त नाम की कोई फर्म अस्तित्व में नहीं पाई गई। इस संबंध में सत्यापन पंचनामा तैयार किया गया।
वास्तविक दस्तावेज नहीं थे जांच में यह भी सामने आया कि ऋण की राशि प्राप्त करने के लिए निक्की ट्रेडर्स के नाम से प्रस्तुत दस्तावेजों एवं कोटेशन का उपयोग किया गया तथा ऋण की राशि वास्तविक रूप से मशीनरी खरीदने के लिए उपयोग नहीं की गई। 17 लाख की ऋण राशि सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, रेलवे कॉलोनी शाखा, रतलाम में निक्की ट्रेडर्स के नाम से खोले गए खाते में जमा कराई गई। उक्त खाता आरोपी जाकिर हुसैन द्वारा स्वयं को निक्की ट्रेडर्स का प्रोपराइटर दर्शाते हुए संचालित कराया गया था। फर्जी दस्तावेजों का पर्दाफाश जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी जाकिर हुसैन से निक्की ट्रेडर्स के नाम से तैयार कोटेशन, बैंक संबंधी दस्तावेज, चेक एवं अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया से प्राप्त दस्तावेजों में निक्की ट्रेडर्स के खाते से संबंधित चेक क्रमांक 22301 से 22305 तक कुल पांच चेक तथा कोटेशन के प्रारूप सहित अनेक दस्तावेज प्राप्त हुए। आरोपी के नमूना हस्ताक्षर भी जांच के लिए प्राप्त किए गए। जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि आरोपी जाकिर हुसैन ने श्रम विभाग में निक्की ट्रेडर्स नाम से फर्म का पंजीयन कराया था और उसका पता 63, पी.एन.टी. कॉलोनी, रतलाम दर्शाया गया था। न्यायालय ने इस तथ्य को भी ऋण प्राप्त करने की समग्र परिस्थितियों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना। पिता-पुत्री के फोटो लगाए थे ऋण संबंधी दस्तावेजों में जाकिर हुसैन और ऐहतेशाम बानो दोनों के नाम, फोटो एवं हस्ताक्षर पाए गए। न्यायालय ने बैंक दस्तावेजों एवं साक्ष्य के आधार पर स्पष्ट माना कि 17 लाख का ऋण केवल ऐहतेशाम बानो के नाम पर नहीं, बल्कि उसके साथ जाकिर हुसैन के नाम से भी स्वीकृत हुआ था। मौके के सत्यापन में फर्म का अस्तित्व नहीं मिला जांच अधिकारी द्वारा 15 जनवरी 2021 को औद्योगिक क्षेत्र, साँवेर रोड, इंदौर पहुंचकर मौके का सत्यापन किया गया।
पते का अस्तित्व नहीं मिला
सत्यापन में ई-71, सेक्टर-सी-6 नामक बताए गए पते का अस्तित्व नहीं मिला। उक्त स्थान पर अन्य कंपनी का संचालन पाया गया तथा पूरे क्षेत्र में निक्की ट्रेडर्स नाम की कोई फर्म नहीं मिली। इस संबंध में सत्यापन पंचनामा तैयार किया गया। इसी जांच के आधार पर बैंक ऑफ बड़ौदा से प्राप्त ऋण संबंधी मूल दस्तावेज, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया से प्राप्त खाता एवं बैंक दस्तावेज, निक्की ट्रेडर्स के नाम के दस्तावेज, ऋण आवेदन, स्थापना प्रमाण-पत्र, कोटेशन, चेक तथा अन्य संबंधित अभिलेख जब्त किए गए। अभियोजन ने बैंक अधिकारियों, जांच अधिकारी तथा अन्य संबंधित गवाहों के माध्यम से इन दस्तावेजों को न्यायालय के समक्ष प्रमाणित कराया। न्यायालय ने अभियोजन की कहानी को माना प्रमाणित न्यायालय ने संपूर्ण मौखिक एवं दस्तावेजी साक्ष्य का विश्लेषण करते हुए पाया कि आरोपी जाकिर हुसैन ने अपनी फरार पुत्री सह-आरोपी ऐहतेशाम बानो के साथ मिलकर दौना-पत्तल निर्माण इकाई स्थापित करने के उद्देश्य से ऋण आवेदन प्रस्तुत किया और 17 लाख का ऋण स्वीकृत कराया, निक्की ट्रेडर्स के नाम से कूटरचित कोटेशन प्रस्तुत किया तथा ऋण राशि को मशीनरी खरीदने के वास्तविक उद्देश्य के विपरीत अन्य प्रयोजन में उपयोग किया।
बैंक को धोखा देकर राशि प्राप्त की
न्यायालय ने यह भी माना कि निक्की ट्रेडर्स के नाम से प्रस्तुत कोटेशन के आधार पर बैंक को धोखा देकर 17 लाख की राशि प्राप्त की गई तथा राशि को वास्तविक मशीनरी खरीदने के लिए उपयोग नहीं किया गया। इन परिस्थितियों को न्यायालय ने धारा 420, 467, 468, 471 एवं 120-बी भा.दं.सं. के आरोपों को युक्तियुक्त संदेह से परे प्रमाणित करने वाला पाया। न्यायालय ने दोषसिद्ध पाया
द्वितीय अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश आशीष श्रीवास्तव ने अपने निष्कर्ष में कहा कि अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों से यह प्रमाणित हुआ कि आरोपी ने बैंक से 17 लाख की ऋण राशि प्राप्त करने के लिए धोखाधड़ी की, निक्की ट्रेडर्स के नाम से कूटरचित कोटेशन तैयार किया और उसका वास्तविक दस्तावेज के रूप में उपयोग किया तथा फरार सह-आरोपी ऐहतेशाम बानो के साथ आपराधिक षड्यंत्र किया। परिणामस्वरूप जाकिर हुसैन को सभी आरोपों में दोषसिद्ध किया गया। न्यायालय ने इसी गंभीरता को ध्यान में रखते हुए आरोपी को धारा 420, 467, 468, 471 एवं 120-बी भा.दं.सं. में 5 से 7 वर्ष तक के सश्रम कारावास की सजाएं अधिरोपित कीं। अभियोजन की पैरवी प्रकरण में अभियोजन की ओर से प्रस्तुत बैंक अधिकारियों, पुलिस अधिकारियों एवं दस्तावेजी साक्ष्यों के माध्यम से ऋण स्वीकृति, बैंक खाता, निक्की ट्रेडर्स के दस्तावेज, मौके का सत्यापन, जब्ती तथा आरोपी से संबंधित दस्तावेजों की श्रृंखला न्यायालय के समक्ष स्थापित की गई। अभियोजन द्वारा विशेष रूप से यह स्थापित किया गया कि आरोपी का अपराध केवल ऋण प्राप्त करने तक सीमित नहीं था, बल्कि ऋण प्राप्त करने के लिए कूटरचित दस्तावेज तैयार करना, उनका वास्तविक दस्तावेज के रूप में उपयोग करना, काल्पनिक/अस्तित्वहीन फर्म के नाम का उपयोग करना तथा ऋण राशि को निर्धारित उद्देश्य के विपरीत उपयोग करना अपराध की समग्र श्रृंखला का हिस्सा था। इस प्रकार दस्तावेजी साक्ष्य, बैंक अधिकारियों के कथन, जांच अधिकारी की साक्ष्य तथा घटनाक्रम से संबंधित परिस्थितियों की समग्र श्रृंखला के आधार पर अभियोजन आरोपी जाकिर हुसैन के विरुद्ध आरोपों को युक्तियुक्त संदेह से परे प्रमाणित करने में सफल रहा।