वो मात्र 6 वर्ष की उम्र की है। लेकिन उस नन्ही ने जो बड़ा काम किया है, उस काम ने इस मासूम को रातों रात विश्व में चर्चा में ला दिया है। रतलाम से जुड़ी इस मासूम ने कैंसर पीडि़तों के लिए जो किया अब वो मिसाल बन गया है।
रतलाम. वो मात्र 6 वर्ष की उम्र की है। लेकिन उस नन्ही ने जो बड़ा काम किया है, उस काम ने इस मासूम को रातों रात विश्व में चर्चा में ला दिया है। रतलाम से जुड़ी इस मासूम ने कैंसर पीडि़तों के लिए जो किया अब वो मिसाल बन गया है।शहर के तिरुपति नगर में रहने वाले कमलेश भंडारी की नातिन मिशिका जैन ने दुबई में मात्र 6 वर्ष की उम्र में अपने लंबे केश का दान कर दिया। यह कार्य उन्होंने हेयर एंड होप संस्था के बैनर तले किया। यह संस्था कैंसर से पीडि़त मरीज व छोटे बच्चों के लिए 2003 से काम करती है। मिशिका की माता के अनुसार कैंसर मरीजों के जब केश उड़ जाते हंै तो उनको विग लगाना पड़ती है। इस विग निर्माण के लिए ही केश का दान किया।
शहर के भंडारी ने बताया कि उनकी रिश्तेदार मिशिका दुबई में सीनियर केजी की स्टूडेंट है। मिशिका ने स्थानीय पेपर में एक फोटो देखा जिसमे एक जवान व्यक्ति के सिर पर व पलकों के केश नहीं थे। इसके बाद अपनी मां नेहा जैन से इस बारे में सवाल किए, तब उन्होंने कैंसर और उसके प्रभाव के बारे में बताया। इसके बाद मिशिका ने अपने केश दान करने इच्छा जताई, जिसके बाद परिवार ने संस्था को उसके केश दान कर दिए।
पहले दी समझाइश
पहले तो माता पिता ने उसे समझाने का प्रयास किया लेकिन मिशिका नहीं मानी। मिशिका के पिता मूल रूप से कोटा निवासी हैं व दस वर्षो से दुबई में हैं, जबकि नेहा रतलाम की है।