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पैसों से भरा एक बैग, एक गलती और 33 साल का बोझ…आखिरकार साकिर ने लौटाई दोस्त की अमानत

MP News: पैसों से भरा एक बैग, एक गलती और फिर 33 साल तक दिल पर रखा एक भारी बोझ...मध्यप्रदेश के रतलाम से सामने आई यह कहानी इंसान की अंतरात्मा और ईमानदारी की ऐसी मिसाल है, जिसे जानकर हर कोई भावुक हो जाएगा।

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MP News ईमानदारी की मिसाल ( photo source : patrika)

MP News: पैसों से भरा एक बैग, एक गलती और फिर 33 साल तक दिल पर रखा एक भारी बोझ…मध्यप्रदेश के रतलाम से सामने आई यह कहानी इंसान की अंतरात्मा और ईमानदारी की ऐसी मिसाल है, जिसे जानकर हर कोई भावुक हो जाएगा। सांख्यिकी अधिकारी साकिर हुसैन मंसूरी ने 33 वर्ष पहले मिली एक बड़ी राशि को उसके वास्तविक मालिक को लौटाकर ईमानदारी और नैतिक मूल्यों की प्रेरणादायक मिसाल पेश की है।

साल 1993 में मिला था पैसों से भरा बैग

साकिर, जो जिला पंचायत में सहायक सांख्यिकी अधिकारी हैं और शहर में वेदव्यास कॉलोनी के निवासी हैं, ने बताया कि वर्ष 1993 में रात्रि लगभग 10 बजे रतलाम से जावरा जाते समय उन्हें रास्ते में एक बैग मिला था। बैग खोलकर देखने पर उसमें लगभग 8000 रुपए नकद राशि, बिलबुक, रसीदें और अन्य कागजात मौजूद थे। उस समय अज्ञानतावश कागजात नष्ट कर दिए गए थे और नकद राशि को साथ रहे मित्र के साथ आधा-आधा बांट लिया गया था।

आत्मा की आवाज जागी

जैसे-जैसे समय बीता, साकिर के मन में यह भावना लगातार बनी रही कि यह राशि किसी की अमानत थी और इसे उसके वास्तविक मालिक तक पहुंचाना चाहिए। आत्मा की आवाज और अंतर्मन की प्रेरणा से उन्होंने वर्षों बाद संबंधित व्यक्ति की तलाश शुरू की।

साकिर के कॉलेज के मित्र निकले बालकृष्ण

लंबे प्रयासों के बाद आखिरकार उस राशि के वास्तविक मालिक, मेडिकल एजेंसी के बालकृष्ण का पता चल गया। बालकृष्ण इत्तेफाक से साकिर के कॉलेज के मित्र भी निकले। साकिर ने बताया कि इस बीच उनका वह मित्र, जिसके साथ उन्होंने राशि बांटी थी, स्वर्गवास हो चुका था। इसलिए उन्होंने हुसैन मंसूरी अपने हिस्से सहित संपूर्ण राशि बालकृष्ण को विनम्रतापूर्वक क्षमा याचना के साथ सौंप दी।

साकिर ने सुनी अपने अंतर्मन की आवाज

राशि लौटाते हुए साकिर ने कहा, यदि इंसान से कोई गलती हो जाए, तो उसका अंतर्मन उसे लगातार संकेत देता रहता है। सच्चा सुकून तभी मिलता है जब व्यक्ति अपनी गलती को स्वीकार कर उसे सुधारने का साहस दिखाए।