
रतलाम। रेल मंडल में बी से लेकर डी स्तर तक के रेलवे स्टेशनों पर पेयजल संकट ने दस्तक दे दी है। पानी की टंकियों में अब नीर खत्म होने लगा है। एेसे में अंचल में विशेषकर आदिवासी क्षेत्रों में निजी बोतल लेकर पानी खरीदने को आदिवासी मजबूर हो रहे है। इन सब के बाद भी अब तक कोई योजना इसके लिए नहीं बनी है।
प्रत्येक वर्ष रेलवे कूडे़ल डेम में पानी समाप्त होने के पूर्व वॉटर स्पेशल ट्रेन चलाने की योजना बनाता है। इस बार भी इसको अप्रैल माह में चलाया जाएगा। 24-24 डिब्बों की ट्रेन में पानी लाकर रतलाम में रेलवे कॉलोनी की पुर्ति की जाती है। लेकिन अब तक रेलवे ने छोटे स्टेशन को लेकर कोई योजना बनाई ही नहीं है।
संकट के बाद भी सुध नहीं
एेसे में मंडल के मेघनगर, रावटी, बिलड़ी, बामनिया, ढोढऱ, बड़ायलाचौरासी, पिपलौदाबागला जैसे स्टेशन पर पेयजल की कमी होने लगी है। ये वो रेलवे स्टेशन है जहां पर पार्सल या डेमू स्तर की ट्रेन का ठहराव होता है। इन स्टेशनों पर यात्रियों की संख्या तो खुब होती है, लेकिन रेलवे यहां बडे़ शहरों जैसी सुविधा नहीं देता है। एेसे में यात्रियों को या तो स्टेशन के बाहर की होटल से पानी खरीदना होता है या फिर स्टेशन पर चल रही एक मात्र स्टॉल से। एेसे में बाहर से ले या प्लेटफॉर्म से यात्री को पानी की बोतल २० रुपए में मिलती है। गत वर्ष तो दैनिक यात्री संघ ने इस मामले में ज्ञापन देकर मांग की थी की पेयजल संकट का स्थायी समाधान होना चाहिए, तब भरोसा दिया गया था। लेकिन अब तक इस मामले में प्रयास नहंी हुए है।
सूचना के बाद भी कोई हल नहीं
पूर्व से लेकर अब तक इस बारे में अनेक बार स्टेशन प्रबंधक को सूचना दी गई थी। तब भरोसा दिया गया था की इस मामले में सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा। अब तक इस मामले में कुछ नहीं हुआ। फिर से विभिन्न स्टेशन पर पेयजल संकट शुरू हो गया है।
- महावीर सिसौदिया, सदस्य, दैनिक रेल यात्री संघ
लगातार समाधान हो रहा है
जब-जब स्टेशन पर पेयजल के संकट की सूचना मिल रही है, समाधान किया जा रहा है। इसके बाद भी अगर कहीं से पेयजल संकट की समस्या यात्रियों को आती है तो वे १३३ नंबर पर शिकायत कर सकते है।
- जेके जयंत, जनसंपर्क अधिकारी, रतलाम रेल मंडल