देशभर में रेलवे द्वारा किए गए एक काम की तारीफ हो रही है। असल में अगे्रजों के समय से इंजन चलाने वाले चालक व सबसे अंतिम डिब्बे में रहने वाले गार्ड को जो लोहे की पेटी दी जाती थी, उसको बदल दिया है। अब इसके स्थान पर जो दिया जाएगा, उस काम को पसंद किया जा रहा है।
रतलाम. देशभर में रेलवे द्वारा किए गए एक काम की तारीफ हो रही है। असल में अगे्रजों के समय से इंजन चलाने वाले चालक व सबसे अंतिम डिब्बे में रहने वाले गार्ड को जो लोहे की पेटी दी जाती थी, उसको बदल दिया है। अब इसके स्थान पर जो दिया जाएगा, उस काम को पसंद किया जा रहा है। इसकी शुरुआत उत्तर रेलवे से हो गई है व अब देशभर में लागू करने की तैयारी अंतिम चरण में है।
ट्रेन में रनिंग लाइन के कर्मचारियों को जिस लोहे की पेटी को लेकर चलना होता है, अब उसको आधुनिक कर दिया गया है। अब तक नियम की किताबों को लेकर रनिंग कर्मचारियों को लेकर चलना होता था, अब सारे नियम एक टैबलेट में समा दिए गए है। इतना ही नहीं, भारी भरकम लोहे की पेटी के बजाए एक छोटा ब्रिफकेस दिया जाएगा। रेलवे इस निर्णय पर सभी पक्ष की मंजूरी बनाने का कार्य करेगा।
रेलवे ब्रीफकेस में बदलेगा
रेलवे के रनिंग विभाग के कर्मचारियों में गार्ड, रेल चालक शामिल है। इनके लोहे को बक्से को अब रेलवे ब्रीफकेस में बदलने जा रही है। इनके स्थान पर एक छौटा बैग तो दिया ही जाएगा, इसके साथ - साथ टैबलेट भी शामिल रहेगा। नए हो रहे इस बदलाव से रेलवे के साथ - साथ यात्रियों को भी लाभ होगा।
छोटे ब्रीफकेस में बदलाव
ट्रेन के इंजन में रेल चालक व अंतिम डिब्बे में सवार गार्ड को अब भारी भरकम लोहे के बक्से ले कर नहीं चलना होगा। रेल चालक व गार्ड के काम को आसान बनाने के लिए रेलवे उनके भारी भरकम लोहे के बक्सों को हल्के प्लास्टिक के छोटे ब्रीफकेस में बदलाव करने जा रहा है। पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर इसकी शुरूआत उत्तर रेलवे में कर दी गई है। रेल मंडल में भी अब तक जो लोहे की पेटी दी जाती रही है, उसका टेंडर अगले माह समाप्त होने जा रहा है व रेलवे इसको नया नहीं करेगी।
क्या होता है इस बक्से में
असल में रेल चालक व गार्ड के बक्से में ट्रेन को चलाने के नियमों की किताब, लाल और हरी झंडी, लाइटें, इमरजेंसी लाइट व ट्रेन के परिचालन से संबंधित कुछ सामान होता है। किसी भी रेल इंजन चालक व गार्ड को ट्रेन में जाने के पहले इन सामानों के साथ लोहे के इस बक्से को ट्रेन में चढ़ाना अनिवार्य होता है।
बचेंगे रेलवे के पैसे
फिलहाल इंजन चालक व गार्ड के पास जो बक्सा होता है वो लोहे का होता है और काफी भारी होता है। इस बक्से को ट्रेन में चढ़ाने के लिए रेलवे की ओर से ठेके के कर्मचारी लगाए जाते हैं। नई व्यवस्था के तहत लोहे का यह बक्सा प्लास्टिक के ब्रीफकेस में बदला जा रहा है। इसमें पहिए भी लगे हुए हैं। ऐसे में गार्ड को अपना अपना बक्सा ट्रेन में स्वयं ले कर जाना होगा। अब बक्से ट्रेन में चढ़ाने के लिए कर्मी नहीं लगाने होंगे।
किताब को टैबलेट में
रनिंग कर्मचारी को अपने बक्से में रेलवे की भारी भरकम नियम की किताब व वर्किंग टाइम टेबल ले कर चलना अनिवर्य है। इसका काफी वजन होता है। इसको ध्यान में रखते हुए इस रूल बुक व वर्किंग टाइम टेबल को डिजिटल बना कर एक टैबलेट में लोड कर दिया जा रहा है। इससे इनके बक्से का वजन और कम हो जाएगा।
यात्रियों को भी होगी सुविधा
रेलवे स्टेशनों के प्लेटफार्म पर यहां - वहां गार्ड का बक्सा पड़ा रहता है। भारी भरकम लोहे के बक्से यहां वहां पड़े रहने के चलते कई बार यात्रियों को काफी असुविधा का सामना करना पड़ता है। नई व्यवस्था के तहत रनिंग कर्मचारी अपना ब्रीफकेस अपने साथ ले जाएगा। ऐसे में यात्रियों को असुविधा नहीं होगी। इस निर्णय को सभी की सहमती से लागू किया जाएगा।
- खेमराज मीणा, मंडल रेल प्रवक्ता