- बिलपांक के गुर्जरपाड़ा गांव में एक वर्ष पहले हत्या का मामला
रतलाम। तृतीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश विवेक कुमार श्रीवास्तव की कोर्ट ने जमीनी विवाद के चलते बेटे द्वारा पिता की लाठी से पीट-पीटकर हत्या के मामले में आरोपी बेटे को गुरुवार आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। पूरे मामले मे आरोपी पति के खिलाफ चश्मदीद गवाह पत्नी रही है, जिसने कोर्ट में श्वसुर की हत्या का पूरा घटनाक्रम बताया।
लोक अभियोजक सुभाष जैन ने बताया कि गुर्जरपाड़ा गांव निवासी मुकेश पिता भेरूलाल मईड़ा ने 7 फरवरी 2017 को शिकायत दी थी कि वह फिलहाल रतलाम मोतीनगर रहता है। वह ट्रेक्टर चलाकर अपना गुजर बसर करता है। उसके पिता एक दिन पहले रतलाम से गुर्जरपाड़ा गांव जमीन की बात करने के लिए उसके भाई शांतिलाल मईड़ा के पास आए थे। उसे पता चला कि पिता की हत्या हो गई है। जिसकी लाश भाई शांतिलाल की निर्माणाधीन टापरी की पास पड़ी है। पिताजी की 16 बीद्या जमीन थी। जिस पर भाई शांतिलाल ने कब्जा कर रखा था। पिता जी यह कहकर उसके पास से निकले थे कि शांतिलाल ने पूरी जमीन पर कब्जा कर लिया है और बिना पूछे वहां टापरी बना रहा है। उसे मना करके आता हूं। उस वक्त उसके पिताजी ने सफेद धारीवाली शर्ट व सफेद धोती पहन रखी थी। लेकिन जब उन्होंने गांव जाकर शव देखा तो उनके कपड़े बदले हुए थे। सिर, हाथ व पैर तथा कमर पर गंभीर चोट लगी थी। तत्कालीन बिलपांक थाना प्रभारी वरुण तिवारी ने हत्या में आरोपी भाई शांतिलाल के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की थी।
हत्यारे बेटे की पत्नी ने दी गवाह
मृतक की बहू अमरी बाई पति शांतिलाल मईड़ा ने गवाही दी थी कि घर पर शाम करीब चार बजे की बात है। वह घर पर थी। उस समय श्वसुर भैरूलाल बैठकर खाना खा रहें थे। उसके घर पर शादी में जाने के लिए मेहमान आए ोि। जिन्हें छोड़कर पति शांतिला वापस आ गया। उसने पिता से झगडऩा शुरू कर दिया। आरोपी शांतिलाल आए दिन झगड़ा करता था। उसे सामने रखी लाठी उठाकर पिता पर वार करना शुरू कर दिया। जिससे सिर पर गंभीर चोट आई। पिता की मौत होने पर आरोपी बेटा भागने लगा। उसे रोकने का प्रयास भी किया। उससे शादी हुए छह वर्ष हुए थे। दो बच्चे है।
यह सुनाया फैसला
कोर्ट ने आरोपी बेटे शांतिलाल मईड़ा को हत्या के मामले में धारा 302 के तहत आजीवन कारावास व पांच हजार रुपए जुर्माना तथा धारा 201 साक्ष्य छुपाने के तहत तीन साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।