कार्डियोलॉजी और न्यूरोलॉजी डिपार्टमेंट में डॉक्टरों की नियुक्ति के लिए अपनी तरफ से चिकित्सा शिक्षा विभाग को प्रस्ताव भेज दिया है।
रतलाम. मेडिकल कॉलेज में आने वाले मरीज अब तक जिस बड़ी स्वास्थ्य सेवा से वंचित है वह जल्द ही मिलने की उम्मीद जाग गई है। मेडिकल कॉलेज की तरफ से कार्डियोलॉजी और न्यूरोलॉजी डिपार्टमेंट में डॉक्टरों की नियुक्ति के लिए अपनी तरफ से चिकित्सा शिक्षा विभाग को प्रस्ताव भेज दिया है। कार्डियोलॉजिस्ट के लिए एक और न्यूरो सर्जन के तीन पदों के लिए यह प्रक्रिया की गई है। गौरतलब है कि कॉर्डियोलाजी लैब (कैथ लैब) की सुविधा मेडिकल कॉलेज में शुरू होने वाली है जिसकी स्वीकृति मिल गई है। हालांकि यह सुविधा आउटसोर्स के माध्यम से की जा रही है।
कार्डियोलॉजी और न्यूरोलॉजी डिपार्टमेंट मेडिकल कॉलेज में खुलते हैं और इनके डॉक्टर यहां नियमित रूप से सेवाएं देना शुरू करते हैं तो हार्ट और सिर में गंभीर चोंटो के मरीजों को बड़े सेंटर रैफर नहीं करना पड़ेगा और यहीं पर उनका इलाज और ऑपरेशन संभव हो सकेगा। अब तक सिर में गंभीर चोट या हार्ट के गंभीर मरीजों को प्राथमिक इलाज के बाद रैफर किया जाता रहा है।
मेडिकल कॉलेज की शुरुआत 2018 में हुई थी और अस्पताल कोरोना काल में 2020 में शुरू कर दिया गया था। इस समय से लेकर अब तक इन दोनों ही बड़ी जरुरतों को लेकर प्रयास किए किंतु शासन से कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिल पाया। अब शासन न खुद ही इनके प्रस्ताव मांगते हुए जानकारी मांगी है तो इन दोनों ही बड़े डिपार्टमेंट के नए साल में शुरू होने की उम्मीद जागी है।
कार्डियोलॉजी चिकित्सा विज्ञान की वह शाखा है जो हृदय और रक्त वाहिकाओं से जुड़ी बीमारियों के अध्ययन, निदान, उपचार और रोकथाम से संबंधित है, जिसमें हार्ट अटैक, स्ट्रोक, दिल की धडक़न और हाई ब्लड प्रेशर जैसी स्थितियाँ शामिल हैं; इस क्षेत्र के विशेषज्ञ डॉक्टर को कार्डियोलॉजिस्ट कहते हैं। कार्डियक सर्जन हृदय पर सर्जरी करते हैं।
न्यूरोलॉजी चिकित्सा विज्ञान की वह शाखा है जो मस्तिष्क, रीढ़ की हड्डी और तंत्रिका तंत्र से जुड़े सभी रोगों और विकारों के अध्ययन, निदान और उपचार से जुड़ी है। न्यूरोलॉजिस्ट ऐसे डॉक्टर होते हैं जो सिरदर्द, माइग्रेन, मिर्गी, स्ट्रोक, पार्किंसंस रोग, अल्जाइमर, मल्टीपल स्केलेरोसिस और न्यूरोपैथी जैसी स्थितियों का इलाज करते है।
कार्डियोलॉजी और न्यूरोजलॉजी डिपार्टमेंट के लिए शासन को प्रस्ताव अभी दो-तीन दिन पहले ही भेजे गए हैं। शासन ने इसमें रुचि दिखाई है। इससे उम्मीद है कि नए साल में हम यह सुविधा शुरू कर सकेंगे और मरीजों को बेहतर लाभ मिल सकेगा।
डॉ. अनिता मुथा, डीन, मेडिकल कॉलेज