
रतलाम। चार्टर्ड अकाउंटेंट्सके लिए पेशेवर नैतिकता और पारदर्शिता के साथ अब रिकॉर्ड संधारण और ऑडिट फीस से जुड़े नियमों का पालन भी महत्वपूर्ण हो गया है। पिछले वर्षों की अविवादित ऑडिट फीस बकाया होने पर निर्धारित शर्तों के तहत ऑडिट रिपोर्ट पर हस्ताक्षर करने में रोक लग सकती है। इन नियमों और पेशेवर कार्यप्रणाली में हुए बदलावों की जानकारी देने के लिए द इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया की रतलाम शाखा ने ‘कोड ऑफ एथिक्स’ विषय पर सेमिनार आयोजित किया। इसमें नए नियमों के व्यावहारिक पहलुओं और सीएकी प्रैक्टिस पर उनके प्रभाव को समझाया गया।
शाखा अध्यक्ष सीए आकाश मित्तल और सचिव सीए यश जैन ने बताया कि चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के पेशेवर जीवन में नैतिकता, पारदर्शिता और आचार संहिता का विशेष महत्व है। सेमिनार में 1 अप्रेल से लागू नए कोड ऑफ एथिक्स के प्रमुख प्रावधानों की जानकारी दी गई।
सेमिनार में बताया गया कि प्रैक्टिस करने वाले सीए को लागू नियमों के अनुसार कैश बुक, लेजर और बिल रजिस्टर सहित आवश्यक लेखा रिकॉर्ड व्यवस्थित रखने होंगे। इससे वित्तीय लेन-देन में पारदर्शिता और पेशेवर जिम्मेदारियों के निर्वहन में मदद मिलती है।
ऑडिट फीस से जुड़े प्रावधानों पर बताया गया कि पब्लिक इंटरेस्ट एंटिटी के मामले में पिछले वर्ष की और अन्य संस्थाओं के मामले में पिछले दो वर्षों की अविवादित ऑडिट फीस बकाया होने पर निर्धारित शर्तों के तहत ऑडिट रिपोर्ट पर हस्ताक्षर करने पर रोक लागू हो सकती है। इसमें संबंधित नियमों के अपवाद और शर्तें भी प्रभावी रहेंगी।
अमित कुमार वच्छानी ने ऑडिट असाइनमेंट की नई सीमा, पेशेवर स्वतंत्रता, दूसरे सीए से ऑडिट का प्रभार लेने तथा फर्मों की वेबसाइट, विज्ञापन और सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करने संबंधी दिशानिर्देशों की जानकारी दी। सदस्यों ने व्यावहारिक उदाहरणों के जरिए नियमों को समझा और सवालों पर चर्चा की।
कार्यक्रम के अंत में वच्छानी को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर पराग जैन, मोहित श्रीमाल, प्रवीण मंत्री, विकास छाजेड़, पूजा छाजेड़ अमित शर्मा, मेहुल पावेचा, अपूर्व मूणत, अजय पाटीदार, चिराग जैन सहित कई सीए सदस्य उपस्थित रहे।