
रतलाम. सर्व ब्राह्मण समाज की ओर से आयोजित नि:शुल्क श्रावणी उपाकर्म के अवसर पर संत विशोकानंद सरस्वती ने शुक्रवार को बड़ी ब्राह्मणों के मध्य कही। उन्होंने कहा कि ब्राह्मणों को सदैव धर्म पथ एवं कर्तव्य पथ पर अडिग रहना चाहिए।
ब्राह्मणों की पहचान तिलक, शिखा और जनेऊ से है, लेकिन आज के कुछ ब्राह्मण भोगवाद के चक्कर में पडकऱ अपनी मूल संस्कृति को भूल रहे हैं। वे पाश्चात्य संस्कृति को अपनाकर अपना महत्व घटाते जा रहे हैं। ब्राह्मणों को अपने संस्कार एवं संस्कृति को पुन: अपनाकर अपना वर्चस्व स्थापित करना चाहिए।
ब्राह्मणों को सशक्त एवं संगठित होना होगा
संयोजक पुष्पेन्द्र जोशी ने कहा कि ब्राह्मण सदैव सभी का आसान निशाना बना हुआ है। क्षत्रिय समाज को छोडकऱ, कई जातियां, पंथ और राजनैतिक पार्टियां, यहां तक कि सारे देश भी ब्राह्मणों को कुचलना चाहते हैं। वे जानते हैं कि जब तक ब्राह्मण कमजोर नहीं होंगे तब तक देश और सनातन धर्म कमजोर नहीं होंगे। इसलिए ब्राह्मणों को अपने आपसी मतभेदों को भुलाकर सशक्त एवं संगठित होना होगा। पं चंद्रशेखर जोशी ने दशविध स्नान, तर्पण और नवीन जनेऊ धारण के साथ हवन-पूजन कर श्रावणी उपाकर्म संपन्न कराया। संचालन जनक नागल ने एवं आभार प्रवीण उपाध्याय ने किया।
इस अवसर पर ये रहे मौजूद
इस अवसर पर अनुराग लोखंडे, प्रवीण उपाध्याय, शैलेन्द्र तिवारी, जगदीश उपाध्याय, वीरेंद्र कुलकर्णी, महेश जोशी, महेंद्र व्यास, श्रीराम दीवे, गोविंद उपाध्याय, कैशव पाठक, बी एस मोड़, अनिल भट्ट, सुशील तिवारी, अरविंद मिश्रा, प्रकाश लोखंडे, संजय दीक्षित, अखिलेश श्रोत्रिय, आदर्श दुबे, कृष्णगोपाल आचार्य, प्रदीप शिकारी, जीवेश जोशी, अखिलेश भट्ट, गुणवंत व्यास, भरत उपाध्याय, उत्तम शर्मा एमएम बटवाल, संदीप व्यास, सूर्यवंश शर्मा, मनीष व्यास सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित थे।