
रतलाम। जुलाई माह में हिंदू पंचाग के अनुसार सावन मास की शुरुआत होना है। सावन के बारे में धर्मग्रंथ में लिखा हुआ है कि सावन में जो बाबा महादेव से जुड़ी वस्तु की खरीदी करता है, उस पर महादेव व महादेवी की विशेष कृपा होती है। ये बात केरल की तंडी ज्योतिष परंपरा के विशेषज्ञ वीरेंद्र रावल ने रविवार को इंद्रा नगर में कही। वे भक्तों को सावन माह के महत्व के बारे में बता रहे थे।
ज्योतिषी रावल ने कहा कि सावन माह का सीधा संबंध भगवान सदाशिव से होता है। इस बार ये सावन का माह 28 जुलाई को शुरू होगा। पंचाग के अनुसार श्रावण मास की तिथि 27 जुलाई को लग जाएगी, लेकिन इसको 28 जुलाई से सूर्य उदय के साथ माना जाएगा। सावन का पहला सोमवार 30 जुलाई को आएगा। एेसे वे वस्तुएं जो बाबा महादेव को विशेष पसंद है उनको अगर घर पर जाते है तो सदाशिव की विशेष कृपा होती है। इस बार सावन में चार सोमवार आएंगे।
ये है वो खास वस्तुएं
ज्योतिषी रावल ने बताया कि सावन माह में किसी भी सोमवार को शिव मंदिर से भस्म लाने पर शिव जी की कृपा मिलती है। इसी प्रकार रुद्राक्ष चाहे वो कितने भी मुख का हो, लाने या पहनने से लाभ होता है। रुद्राक्ष के मामले में तो ये सभी को पता है कि इसकी उत्पत्ति भगवान शिव के आंसुओं से हुई थी। अगर सोमवार को इसको लाकर घर के पूर्वी उत्तर कोने में रखते है तो आर्थिक लाभ भी होगा। गंगा जल की मान्यता के बारे में किसी को बताने की अब जरुरत नहीं है। अगर सोमवार को गंगा जल लाकर घर के किचन में इसको रखा जाता है तो घर में अन्नपूर्णा का वास होता है। चांदी या तांबे का त्रिशुल को अगर घर के सबसे पहले कमरे में रखते है तो घर की नकारात्मक उर्जा समाप्त होती है।
ये है भगवान शिव का अंग
अगर सावन माह में किसी भी सोमवार को चांदी या तांबे का नाग - नागिन लेकर आते है व इसको घर के मुख्य दरवाजे के नीचे दबाकर रखते है तो पूर्वज प्रसन्न होते है। इसके अलावा रुके हुए सभी कार्य होना शुरू हो जाते है। इसी प्रकार घर में अगर डमरू को लाया जाए व बच्चे इसको बजाए तो नकारात्मक उर्जा समाप्त होती है। इसके अलावा बच्चों का पढऩे में मन और अधिक लगेगा। जिस तरह से परिवार के पूजा के कमरे में चांदी की गाय रखने का महत्व है उसी प्रकार से चांदी के नंदी रखने से धन की कभी कमी नहीं रहती है। इसी प्रकार जल से भरा तांबे का कलश रखने से परिवार में प्रेम व विश्वास कायम रहता है। इस जल से भरे कलश को प्रतिदिन सुबह भरे व अगले दिन वृक्ष में डालकर नया जल भरकर पूजन के स्थान पर रखना चाहिए।