रतलाम

Ratlam : आइटीआइ करने में अब आड़े नहीं आएगी पैसों की कमी

बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ के तहत महिला एवं बाल विकास विभाग ने पांच गरीब लड़कियों को आइटीआइ में पढ़ाई जारी रखने के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई है। कलेक्टर अजय कटेसरिया के माध्यम से इन्हें राशि के चेक दिए गए।
2 min read
Sep 07, 2026
ratlam news
बालिका को राशि का चेक देते हुए कलेक्टर कटेसरिया

रतलाम. आर्थिक रूप से कमजोर और पैसों की तंगी की वजह से आइटीआइ में अपनी पढ़ाई आगे निरंतर नहीं रखने की मजबूरी अब पांच बालिकाओं के सामने नहीं रहेगी। अब वे अपनी पढ़ाई निरंतर आगे जारी रख सकेंगी। कलेक्टर कटेसरिया की पहल के बाद इन आर्थिक रूप से कमजोर बालिकाओं को आईटीआई प्रवेश के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग ने बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ के तहत चेक दिए तो इनके चेहरे खुशी से चमक उठे।

ऐसे पता चला विभाग को

महिला बाल विकास विभाग के माध्यम से आइटीआइ के सहयोग से शिविर लगाया था। बालिकाओं का रजिस्ट्रेशन आइटीआइ के लिए करवाया गया। इनमें से पांच बालिकाओं को अंतिम रूप से चयनित किया और उनकी फीस बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना के माध्यम देने का निर्णय किया गया। ये वे लड़कियां हैं जो आइटीआइ में प्रवेश तो ले चुकी है, किंतु इन्हें अपनी नियमित फीस जमा करने के बीच परिवार की आर्थिक तंगी सामने आने लगी। इस अवसर पर महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से जिला कार्यक्रम अधिकारी सुभाष जैन, सहायक संचालक भारती दांगी, आईटीआई से नोडल प्राचार्य एवं महिला आईटीआई से प्राचार्य उपस्थित थे।

दो छात्राएं ड्रॉप आउट रही

महिला एवं बाल विकास विभाग की सहायक संचालक भारती दांगी ने बताया शिविर लगाकर हमने पहले 15 लड़कियों को आर्थिक मदद देने के लिए चुना। इनके फॉर्म भरवाकर रजिस्ट्रेशन करवाया तो पांच पांच छात्राओं की आइटीआइ में प्रवेश मल गया। इन पांच में से दो छात्राएं स्कूल से ड्रॉप आउट होकर उनकी शादी हो चुकी थी। इन्हें विभाग के कर्मचारियों ने मोटिवेट किया और रजिस्ट्रेशन करवाया तो इनका चयन आइटीआइ में हो गया। अब ये दोनों भी पढ़ सकेंगी।

सराहनीय पहल : 15000 रुपए से भरा पर्स लौटाया

समीपस्थ ग्राम सेजावता के तीन युवा डुम्पाल सिंह, पुष्कर शर्मा व महिपाल सिंह रविवार को मां बगलामुखी नलखेड़ा के दर्शन करने गए थे। शाम को लौटते समय मंदिर से कुछ दूर आने पर उन्हें एक पर्स मिला जिसमें 15 हजार रुपए, एटीएम कार्ड औक आधार कार्ड आदि थे। आधार कार्ड के अनुसार असल व्यक्ति का नाम सर्च किया तो राऊ (इंदौर) निवासी रितेश निपानिया का यह पर्स पाया गया। तीनों दोस्तों ने इंसानियत को देखते हुए उसी समय फोन करके उनसे पूछताछ की। रात ज्यादा होने और रितेश के भी इंदौर पहुंचने पर वे पर्स लेने नहीं आ पाए।

रतलाम बुलाया और दिया पर्स

रात में तीनों दोस्त भी रतलाम अपने गांव सेजावता आ गए। सोमवार को इन्होंने रितेश को रतलाम अपने गांव सेजावता बुलाया। उससे पर्स के बारे में पूरी तरह संतुष्ट होने पर उसे रुपयों से भरा पर्स, एटीएम कार्ड और आधार कार्ड लौटा दिया। यहां रितेश से उसका असली आधार कार्ड और पर्स में मिले आधार कार्ड को मिलान करके अपनी संतुष्टी की थी।

Updated on:
07 Sept 2026 08:21 pm
Published on:
07 Sept 2026 08:20 pm