
रतलाम. अपनी पुत्री को भगाकर ले जाने और उससे विवाह करने वाले युवकों का विरोध करने वाले पिता को चाकू से प्राणघातक हमला करने वाले पांच आरोपियों भय्यू उर्फ यश पिता मधुसुदन देशमुख (25) निवासी भंडारी गली, रेहान उर्फ बाल पिता जब्बार खान (21) निवासी जूनी कलालसेरी, ईशु उर्फ इस्सु उर्फ ऋषि पिता नंदकिशोर असावरा (25) निवासी सुदामा परिसर उंकाला रोड़, पंकज उर्फ चिंकू पिता अमरलाल जलान्द्रिया (22) निवासी बजरंग नगर और पंकज उर्फ उदय पिता कमलेश सिंह चौहान (25) निवासी दिलीप नगर को न्यायालय ने सात-सात साल की सजा सुनाई है। यह फैसला सप्तम अपर सत्र न्यायाधीश रतलाम राजेश नामदेव की अदालत ने सुनाया।
अपर लोक अभियोजन समरथ पाटीदार ने बताया कि पीडि़त पिता रात लगभग पौने एक बजे अपने परिवार के साथ कबीर साहब मंदिर परिसर के पीछे स्थित मकान में सो रहा था। उनकी की 18 वर्षीय पुत्री को आरोपी भय्यू उर्फ यश भगाने एवं जबरन विवाह करने का प्रयास किए जाने के कारण परिजनों ने पुत्री को उसकी नानी के पास भेज दिया था। इसी बात से नाराज होकर आरोपी भय्यू उर्फ यश अपने अन्य पांच साथियों के साथ 30 जनवरी 2024 की रात्रि में फरियादी के मकान पर पहुंचा। आरोपियों ने मकान का दरवाजा तोडक़र मकान में प्रवेश किया और फरियादी पर जान से मारने की नीयत से धारदार चाकू से प्राणघातक हमला कर दिया। बचाने आए उसके पुत्र, पत्नी एवं माता पर भी आरोपियों ने चाकू से हमला किया था। पांचों आरोपियों के विरुद्ध अभियोगा पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। एक आरोपी नाबालिक होने से उसका अभियोग पत्र बाल न्यायालय में प्रस्तुत किया था। आरोपी भय्यू उर्फ यश को हाईकोर्ट से भी जमानत नही मिलने से गिरफ्तारी दिनांक 1 फरवरी 2024 से ही जेल में है। शेष आरोपी जमानत पर होने से इन्हें जेल भेज दिया गया।
14 वर्ष पुराने बहुचर्चित गौवंश एवं शराब का अवैध परिवहन करने वाले स्थाई वारंटी रज्जाक उर्फ रजाक उर्फ डंडू पिता सुलतान खान (45) निवासी नई आबादी बोतलगंज जिला मंदसौर को न्यायालय ने 1 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा एवं 5000 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया है। यह फैसला मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सपना भारती कतरोलिया की अदालत ने सुनाया। आरोपी पर धारा 4,6,10 मप्र कृषि उपयोगी पशु संरक्षण अधिनियम, 4/9, 6/9 गोवंश वध प्रतिषेध अधिनियम 11 डी पशुक्रुरता अधिनियम में केस दर्ज था। उप-निदेशक अभियोजन आशा शाक्यवार ने बताया कि घटना 7 जनवरी 2012 को आलोट थाना क्षेत्र की है।
कांग्रेस नेता आरआर खान के हत्यारे कुख्यात बदमाश गुलफाम को फरारी काटने के दौरान उत्तरप्रदेश से गिरफ्तार करने वाले आरक्षक नागेश्वर सोलंकी को पदोन्नति देने का आदेश उच्च न्यायालय ने दिया है। न्यायमूर्ति रमेश फडक़े ने याचिका पर निर्णय पारित करते हुए आदेश दिया कि सोलंकी को आरोपी गुलफाम को अरेस्ट करने की 22 जुलाई 2010 से पदोन्नति दी जाए।
अधिवक्ता केसी रायकवार ने बताया तत्कालीन एसपी मयंक जैन ने 25 हजार के इनामी बदमाश गुलफाम को पकडऩे के लिए विशेष टीम गठित की थी। टीम में शामिल आरक्षक सोलंकी ने यूपी पुलिस की मदद से बदमाश को घेर कर पकड़ा था। 18 जुलाई 2010 को साइबर सेल के मनोज सिंह और नरेंद्र को टीम में शामिल किया था। शासन ने इन दोनों को पदोन्नति दे दी, लेकिन मुख्य भूमिका निभाने वाले सोलंकी को वंचित रखा गया। इस पर सोलंकी की तरफ से इंदौर खंडपीठ मे याचिका दायर की थी। न्यायालय ने याचिकाकर्ता के पक्ष में फैसला दिया।