शनि ने गिराई कर्नाटक की सरकार, समय रहते करें आप खुश, न तो गिर जाएगी आपकी भी सरकार
रतलाम। केंद्र में भाजपा की सरकार होने व 104 सीट लाने के बाद भी केंद्र में भाजपा की सरकार क्यों गिरी। इसके पीछे ज्योतिषी कारण शनि को बता रहे है। रतलाम के वरिष्ठ ज्योतिषी एनके आनंद का कहना है कि शनि की साढे़साती इस समय कर्नाटक के मुख्यमंत्री की कुंडली में चल रही थी, एेसे में सरकार तो गिरना ही थी। पुनर्वसु नक्षत्र, पंचम भाव में केतु के साथ मंगल का होने ने पुलिस को सरकार के खिलाफ खड़ा कर दिया था।पुनर्वसु नक्षत्र में सरकार गई है, इस नक्षत्र में जा जाता या जाती है, वो फिर आता या आती है। एेसे में ये जरूरी है कि समय रहते हर व्यक्ति शनि को प्रसन्न करें, न तो शनि अमंगल करता है।
ज्योतिषी आनंद ने बताया कि कर्नाटक में मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा के शपथ ग्रहण के बाद सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम के जजों ने शनिवार शाम चार बजे विधानसभा में बहुमत परीक्षण कराने का आदेश दिया। इस फैसले के बाद बीजेपी को बहुमत साबित करने के लिए अब 14 दिनों का समय नहीं मिला। ऐसे में बड़ा सवाल था कि क्या शनिवार को एक बार फिर कर्नाटक में मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा की कुर्सी बचेगी या जाएगी।
क्या कहती है उनकी कुंडली
ज्योतिषी आनंद के अनुसार येदियुरप्पा की जन्मकुंडली के अनुसार इस समय उनकी कुंडली में शनि की साढ़ेसाती चल रही हैं। 17 मई को येदियुरप्पा ने जिस समय शपथ लिया था उस समय उनकी कुंडली में अष्टम भाव में मंगल और केतु की दशा थी। मंगल और केतु की स्थिति नकारात्मक प्रभाव देती है। इसके अलावा कुंडली का आठवां अशुभ और विवाद का कारक माना जाता है।
ये है जन्म का समय
ज्योतिषी आनंद के अनुसार बी.एस. येदियुरप्पा का जन्म 27 फरवरी 1943 को तड़के 3 बजे कर्नाटक के मांडया जिले में धनु लग्न में कुंडली के छठे भाव में हुआ था। बी.एस. येदियुरप्पा की कुंडली में शनि की महादशा और टेढ़ी नजर है जिसके कारण उनका विधानसभा में बहुमत हासिल करना मुश्किल साबित हुआ।पुनर्वसु नक्षत्र में सरकार गई है, इस नक्षत्र में जा जाता या जाती है, वो फिर आता या आती है।
ये करें शनि को प्रसन्न करने के लिए
ज्योतिषी आनंद के अनुसार शनि को प्रसन्न करने के लिए अनेक प्रकार के तप, जप बताए गए हैं, लेकिन सबसे बेहतर शनिसहस्त्रनाम का पाठ के साथ-साथ भगवान हनुमान मंदिर में प्रतिदिन चमेली के तेल का दीपक या फिर पीपल के वृक्ष में सरसों के तेल का दीपक संध्या के समय लगाना रहता है।