
snake found in home: मध्यप्रदेश के रतलाम जिले में पुष्पन्द्र सिंह राठौर के घर में उस समय हंगामा मच गया जब अचानक से घर में सांप निकल आया है। बताया जा रहा है सांप को सबसे पहले पुष्पन्द्र सिंह राठौर के घर में 6 साल के बच्चे ने देखा। उसने देखते ही हंगामा मचा दिया। आस पड़ोस के लोग शोर को सुनकर भागे। सांप को देखते ही सभी लोग डर गए क्योंकि ये कोई मामूली सांप नहीं था बल्कि अजगर प्रजाति का बड़ा सांप था।
जानकारी के मुताबिक सैलाना के समीप ग्राम हरसोला में शाम के समय घर पर सभी लोग अंदर थे। अचानक से 6 साल के बच्चे ने शाम को 6.22 पर सांप को देखा पहले उसे लगा कि कपड़ा है लेकिन सांप के हिलते ही शोर मचाना शुरु दिया। तभी घर के अन्य लोग भी बाहर आ गए। सांप का साइज बड़ा होने के कारण किसी ने भी उसे भगाने का प्रयास नहीं किया।
बताया जा रहा है कि ये सांप रसल वाइपर प्रजाति का था। खतरनाक जहरीले सांप को वन विभाग के रेंजर राधेश्याम जोशी के साथ आकर रतलाम डोंगरे नगर निवासी बहादुर मईडा ने सफलतापूर्वक रेस्क्यू कर एक पीले रंग के डब्बे में बंद कर दिया। हालांकि सांप को पकड़ने में काफी टाइम लग गया। गुस्से में सांप बार-बार फन निकाल रहा था। बाद में इस सांप को जंगल में छोड़ दिया गया।
सांप की रसल वाइपर प्रजाति जिसे हिंदी में दबोइया या चंद्रबोड़ भी कहते हैं। ये भारत और दक्षिण एशिया के सबसे जहरीले और खतरनाक सांपों में से एक है। इनका स्वभाव काफी आक्रामक होता है। ये तेज वार करने की क्षमता रखते है। ये काफी अत्यधिक विषैले जहर (हीमोटॉक्सिक) के लिए जाना जाता है। इसके काटने से शरीर में खून का थक्का जमना बंद हो जाता है और किडनी फेल होने का खतरा रहता है। इनको छेड़े जाने पर ये बहुत आक्रामक हो जाते हैं और कुकर की सीटी जैसी तेज आवाज (फुफकार) निकालते हैं।
बीते 2 दिन पहले ही एमपी के राजगढ़ जिले में घर के आंगन में खेल रहे एक पांच साल के मासूम को सांप ने काट लिया, जिससे उसकी मौत हो गई। परिजन उसे बजाए अस्पताल ले जाने के तीन घंटे तक झाड़फूंक करते रहे। जब तक उसे अस्पताल ले जाया गया, तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। पुलिस ने बताया कि विराट पिता दिनेश पारदी (5) निवासी मांडाखेड़ा (राजगढ़) की मौत हो गई। शाम करीब छह बजे उसे घर के आंगन में सांप ने हाथ की अंगुली में काट लिया। इसके बाद परिजन देव स्थान, झाड़ फूंक और अन्य अंधविश्वास के माध्यम में उलझे रहे। रात करीब 9.20 बजे जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
-मरीज को शांत रखें और घबराने न दें।
-काटे गए अंग को कम से कम हिलाएं।
-तुरंत अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र पहुंचें।
-घाव को काटने, चूसने या उस पर कोई रसायन लगाने से बचें।
-रस्सी या कपड़े से अंग को कसकर न बांधें।