रतलाम

जाने इस नगर निगम के अव्वल स्थान पर क्यों उठ गए सवाल

- जनवरी माह में बेहतर प्रदर्शन का दावा, शिकायतकर्ता ने कहा, दबाव रहा निगम
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Updated: 27 Feb 2018, 5:29 PM IST
patrika
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रतलाम। सीएम हेल्पलाइन पर जनवरी माह में शिकायतों के निराकरण में प्रदेश के 16 निकायों को पछाडऩे वाले रतलाम नगर निगम को शिकायतकर्ताओं ने ही चुनौती दे दी है। फरवरी माह में जारी निराकरण की रैंकिंग में रतलाम को प्रदेश में पहला स्थान मिला है, लेकिन अव्वल स्थान के इस 'ताज पर सामाजिक कार्यकर्ताओं ने ही सवाल खड़े कर दिए है। हालांकि निगम के जिम्मेदार इन शिकायतों का नियमों में निराकरण का दावा कर रहे है।

रतलाम नगर निगम को माह जनवरी में सीएम हेल्पाइन पर सबसे ज्यादा ८६.९५ फीसदी शिकायतों के निराकरण पर प्रदेश में ए ग्रेड के साथ पहले स्थान पर रखा गया है। ५२.४२ प्रतिशत निराकरण की दर और १०० दिन से ज्यादा लंबित शिकायतों की कम संख्या के कारण रतलाम नगर निगम १६ अन्य निकायों से आगे रहा है। कागजों पर जारी इस आंकड़ें को शिकायतकर्ता ही कटघरे में खड़ा रहे है। निगम को हेल्पलाइन से मिली शिकायत का निराकरण करने की बजाय शिकायत को बंद करने की धमकी दी गई। कई बार फोन लगाकर दबाव भी बनाया गया, लेकिन शिकायत का निराकरण नहीं किया गया।

इस तरह हल के दावे को चुनौती
केस नंबर एक:
शहर के दीनदयाल नगर में पानी की टंकी के चारों ओर चैंबर की अनियमितता को लेकर ८ जनवरी को सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत की गई थी। शिकायतकर्ता सोमेश वर्मा ११ जनवरी को शिकायत के संबंध में नगर निगम से संपर्क कर बताया गया कि २-३ दिन में निराकरण कर दिया जाएगा, लेकिन १९ जनवरी तक कोई कार्य नहीं किया गया। १० फरवरी को फिर से सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत की गई तो २० फरवरी को निगम इंजीनियर अनिल आचार्य ने प्रतिवेदन डाला कि इस शिकायत का निराकरण हो गया है।

केस नंबर दो
शहर के हिम्मत नगर से विशाल प्रजापति ने उद्यान से लगे हिस्से में पेयजल की मोटर खराब होने पर इसके सुधार की शिकायत दर्ज कराई है। जनसुनवाई से लेकर निगम के शिविर के दौरान भी प्रजापति ने कई बार शिकायत की है। प्रजापति ने बताया कि शिकायत के बाद जब भी जल प्रदाय विभाग के अधिकारियों से बात की जाती है वे कहते है कि जल्द ही निराकरण कर दिया जाएगा, लेकिन शिकायत हल नहीं की जाती।

कई तरह की श्रेणियां
सीएम हेल्पलाइन में ज्यादातर शिकायतों का संतुष्टि के साथ निराकरण किया जाता है। कुछ प्रतिशत असंतोष के साथ निराकृत का होता है, लेकिन वास्तविक स्थित ही दर्शाई जाती है। शिकायतकर्ता पर कोई दबाव नहीं होता, मैं खुद इसकी मॉनिटरिंग करता हूं।
- एसके सिंह, आयुक्त नगर निगम रतलाम

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