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रतलाम. शहर की जयंत विटामिन्स लिमिटेड (जेवीएल) के श्रमिकों को 29 साल बाद उनके हक का पैसा मिलने जा रहा है। श्रम अधिकारी ने कंपनी प्रबंधन को ग्रेच्युटी भुगतान के अंतिम आदेश जारी किए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया है कि प्रबंधन को 7 दिनों के भीतर सभी लंबित राशि का भुगतान करना होगा। उपादान अधिनियम 1972 के तहत कंपनी के 23 कर्मचारियों को बकाया राशि देने के आदेश किए गए हैं। दुखद है कि इस लंबी लड़ाई में कई श्रमिक जीवित नहीं रहे।
जयंत विटामिन्स लिमिटेड, जो 80-90 के दशक में देश की प्रमुख फार्मा कंपनियों में से थी, यह अप्रैल 1997 में बंद हो गई थी। तब करीब 1200 कर्मचारी काम करते थे, जिनमें 400 से अधिक स्थायी थे। भारतीय ड्रग्स एवं केमिकल श्रमिक कर्मचारी परिषद के संजय कुमार के अनुसार कंपनी का बंद होना श्रमिकों के लिए सदमे जैसा था। शुरूआत में 9 महीने का वेतन मिला, फिर लंबा संघर्ष चला। ग्रेच्युटी और बकाया राशि के लिए 2023 में प्रकरण लगाया गया, जिसका फैसला 2025 में आया। संजय ने बताया कि यदि कंपनी प्रबंधन 7 दिन में भुगतान नहीं करता, तो श्रम विभाग सख्त कार्रवाई करेगा।
ब्याज भी वसूलेंगे
निर्धारित अवधि समाप्त होते ही तहसीलदार और कलेक्टर रतलाम को राजस्व वसूली प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा, जिससे मूल राशि के साथ ब्याज भी वसूला जाएगा। श्रमिक संगठन से जुड़े रमेशचंद्र बिडवाल के अनुसार अब जब राशि मिल रही है, तो कई साथी इस दुनिया में नहीं हैं। अब तक करीब 50 साथियों का निधन हो चुका है। एक अन्य योगेंद्र पुरोहित के अनुसार श्रमिकों ने इन 29 सालों में मानसिक प्रताड़ना और आर्थिक नुकसान उठाया है।