धर्म और अध्यात्म

चंद्र ग्रहण 2026 कब है? सूतक, वर्जित काम और मंदिर बंद होने का क्या है रहस्य?

Chandra Grahan 2026 Date kab hai: साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण कब है और इस दिन किन बातों का खास ध्यान रखना चाहिए? इस लेख से समझिए।

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Jan 21, 2026
Chandra Grahan 2026 kab hai date: साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण कब है? (फोटोः एआई)

Moon Eclipse, Chandra Grahan 2026 Date Kab hai: भारतीय परंपरा में ग्रहण महज खगोलीय घटना नहीं है बल्कि इसे धर्म, आस्था और आत्मशुद्धि से जोड़कर देखा जाता है। यही वजह है कि जैसे ही ग्रहण नजदीक आता है, लोगों के मन में कई सवाल उठने लगते हैं। ग्रहण कब है, भारत में दिखाई देगा या नहीं, सूतक काल लगेगा या नहीं और इस दौरान क्या करना चाहिए क्या नहीं। इन्हीं सब सवालों के जवाब हम इस आर्टिकल में देने वाले हैं।

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क्यों चर्चा में रहता है ग्रहण?

धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, ग्रहण का संबंध राहु और केतु से होता है। माना जाता है ग्रहण के समय नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है। यही वजह है कि इस दौरान पूजा पाठ और शुभ कामों को करना वर्जित माना गया है।

इस साल, ‎2026 में ग्रहण कब लगेगा? | When will the eclipse occur this year, in 2026?

साल 2026 में पड़ने वाले ग्रहणों में सबसे महत्वपूर्ण चंद्र ग्रहण 3 मार्च, 2026 को लगेगा। यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई देगा। धार्मिक मान्यता है कि जिस दिन ग्रहण दिखता है, उसी समय से सूतक काल लग जाता है। ऐसे में ग्रहण के समय खास सतर्कता और नियमों का पालन करने की सलाह दी जाती है।

सूतक काल का क्या है महत्व?

शास्त्रों में ग्रहण से पहले के समय को सूतक काल कहा गया है। इस दौरान मंदिरों के कपाट बंद रखे जाते हैं और पूजा पाठ नहीं की जाती। मान्यता है कि ग्रहण के समय देव शक्तियां सक्रिय नहीं रहतीं। उस समय की गई पूजा का फल भी नहीं मिलता। ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान, दान और शुद्धि का विशेष महत्व होता है।

ग्रहण के दौरान क्या करना चाहिए?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण के समय मंत्र जाप, ध्यान और ईश्वर का स्मरण करना शुभ माना जाता है। इस समय दान पुण्य करने का भी विशेष महत्व होता है। ग्रहण खत्म होने के बाद गंगाजल या पवित्र जल से स्नान कर, घर और पूजा स्थल को शुद्ध करना चाहिए।


‎ग्रहण के समय क्या न करें?

शास्त्रों और परंपराओं के मुताबिक, ग्रहण के दौरान भोजन पकाने और खाने से बचना चाहिए। इस समय मूर्ति स्पर्श, नए काम की शुरुआत और मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं। लोकमान्यता है कि, गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

ग्रहण में मंदिर क्यों बंद रहते हैं?


ग्रहण के समय मंदिरों के कपाट बंद रखने की परंपरा काफी पुरानी मानी जाती है। मान्यता है कि इस दौरान देव शक्तियां निष्क्रिय हो जाती हैं, इस वजह से पूजा पाठ करने से का सकारात्मक फल नहीं मिलता।

ग्रहण, सूतक और दान से जुड़े नियम क्या हैं?


‎ग्रहण और सूतक काल के दौरान कुछ कामों से बचने और कुछ कामों को करने की परंपरा है। माना जाता है कि सही तरह से धार्मिक नियमों का पालन करने से ग्रहण के बाद सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इस दौरान दान पुण्य करने का विशेष महत्व बताया जाता है।

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Published on:
21 Jan 2026 06:50 pm
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