
Chankya Niti in Hindi: चाणक्य ने इन जगहों पर रुकने से क्यों किया मना? (PC: AI)
Chankya Niti in Hindi: आचार्य चाणक्य ने अपनी नीति शास्त्रों का विश्लेषण कर लिखी। इसमें उन्होंने जीवन को सफल बनाने के कई अनमोल सुझाव दिए हैं। माना जाता है कि, अगर कोई व्यक्ति इन बातों को अपने जीवन में उतार ले, तो उसे सफल होने से कोई नहीं रोक सकता। चाणक्य ने कुछ ऐसे स्थानों और संगतों के बारे में बताया है, जहां समय बिताना और रहना आपको बर्बाद कर सकता है।
श्लोक:
यस्मिन् देशे न सम्मानो न वृत्तिर्न च बान्धवाः।
न च विद्यागमोऽप्यस्ति वासस्तत्र न कारयेत् ॥
अर्थ: चाणक्य कहते हैं कि, जिस स्थान पर आपका आदर-सम्मान न हो, जहां कमाई का कोई साधन न हो, आपका कोई मित्र या शुभचिंतक न रहता हो और जहां ज्ञान प्राप्ति और शिक्षा की कोई संभावना न हो, ऐसी जगह पर एक पल भी नहीं रुकना चाहिए। ऐसी जगह पर रहकर आप कभी आगे नहीं बढ़ सकते।
श्लोक:
मूर्खस्तु परिहर्तव्यः प्रत्यक्षो द्विपदः पशुः।
भिनत्ति वाक्यशूलेन अदृश्यं कण्टकं यथा॥
अर्थ: चाणक्य कहते हैं, मूर्ख व्यक्ति उस दो पैरों वाले पशु के समान होता है, जिसे तुरंत त्याग देना चाहिए। जैसे, शरीर में चुभा हुआ कोई अदृश्य कांटा लगातार दर्द देता है, वैसे ही मूर्ख व्यक्ति अपनी बेवकूफी भरी बातों से आपको कभी मानसिक कष्ट और नुकसान पहुंचा सकता है। ऐसे व्यक्ति के साथ समय बर्बाद करना खुद को मुसीबत में डालना है।
श्लोक:
मूर्खशिष्योपदेशेन दुष्टास्त्रीभरणेन च।
दुःखितैः सम्प्रयोगेण पण्डितोऽप्यवसीदति॥
अर्थ: किसी मूर्ख शिष्य को ज्ञान देना, स्वभाव से दुष्ट स्त्री के साथ जीवन बिताना या हमेशा नकारात्मक और दुखी रहने वाले लोगों के बीच रहना, एक बुद्धिमान व्यक्ति को भी डिप्रेशन या दुख में डाल सकता है। मेंटल पीस के लिए ऐसे लोगों और स्थितियों से दूर रहना ही बेहतर है।
श्लोक:
धनिकः श्रोत्रियो राजा नदी वैद्यस्तु पञ्चमः।
पञ्च यत्र न विद्यन्ते न तत्र दिवसे वसेत ॥
अर्थ: आचार्य के अनुसार जहां ये 5 चीजें न हों, वहां एक दिन भी नहीं ठहरना चाहिए:
{अस्वीकृतिः यह लेख चाणक्य नीति को आधार मानकर लिखा गया है। हम किसी बात की पूर्ण सटीकता का दावा नहीं करते। अपने स्वविवेक का इस्तेमाल करें।}
Published on:
09 Jan 2026 11:57 am
बड़ी खबरें
View Allधर्म और अध्यात्म
धर्म/ज्योतिष
ट्रेंडिंग
