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Gangaur Aarti Lyrics in Hindi : गणगौर पूजा आरती 2026: अखंड सौभाग्य के लिए गाएं ये सिद्ध आरतियां और मंत्र

Gangaur Aarti Lyrics in Hindi : गणगौर पूजा पर पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए कौन सी आरती गाएं? यहाँ पढ़ें ईसर-गौर और माता पार्वती की संपूर्ण आरती लिरिक्स और पूजा की खास बातें।

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Mar 21, 2026
Gangaur Aarti Lyrics in Hindi : गणगौर पूजा आरती 2026: अखंड सौभाग्य के लिए पूरी आरती, मंत्र और व्रत नियम (फोटो सोर्स: Gemini AI)

Gangaur Aarti Lyrics in Hindi : राजस्थान और उत्तर भारत की संस्कृति का सबसे रंगीला पर्व 'गणगौर' आ चुका है। यह केवल एक व्रत नहीं, बल्कि प्रेम, समर्पण और विश्वास का उत्सव है जहां कुंवारी कन्याएं अच्छे वर के लिए और सुहागिनें अपने पति की लंबी उम्र के लिए शिव-पार्वती (ईसर-गौर) की आराधना करती हैं। बिना आरती के कोई भी पूजा अधूरी मानी जाती है, इसलिए हम आपके लिए लाए हैं गणगौर की विशेष आरतियां।

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गणगौर व्रत का एक सीक्रेट नियम | Gangaur Puja 2026

क्या आप जानते हैं? गणगौर का व्रत जितना श्रद्धा से रखा जाता है, उतना ही इसे गोपनीय रखने की भी परंपरा है। कहा जाता है कि सुहागिन महिलाएं अपने पति से छिपाकर यह व्रत करती हैं, ताकि उनके सुहाग को किसी की नजर न लगे और पूजा का फल पूर्ण रूप से प्राप्त हो।

मुख्य आरती: आरती कीजिए गणगौर ईसर जी की | Gangaur Aarti Lyrics

    पूजा के समापन पर सबसे पहले यह मधुर आरती (Gangaur Aarti) गाई जाती है:

    आरती कीजिए गणगौर ईसर जी की
    गौरी शंकर शिव पार्वती की

    देसी घी को दीप जलायो
    तोड़ तोड़ फूलडा हार बनायो
    लाला फूला की थाने हार पहनायो

    आरती कीजिए………
    महिमा थारी सब कोई गावे
    खीर ढोकला को भोग लगावे
    भंडार उसके भर देते हो

    आरती कीजिए…….
    ईसर म्हारा छैल छबीला
    गोरा म्हारी रूप की रानी
    सुंदर जोड़ी पर वारी वारी जाऊं

    आरती कीजिए…………..
    जो कोई आपकी शरण में आवे
    सर्व सुहाग परम पथ पावे

    आरती कीजिए……….

    पारंपरिक राजस्थानी आरती: 'म्हारी डूंगर चढती सी बेलन जी' | Gangaur Aarti Lyrics

      यह आरती मारवाड़ी संस्कृति की झलक पेश करती है, जिसमें सूर्य, चंद्रमा और ब्रह्मा जी को साक्षी मानकर ईसर-गौर की वंदना की जाती है। इसमें पान, सुपारी, मोती और सिक्कों का अर्पण किया जाता है, जो समृद्धि का प्रतीक है।

      म्हारी डूंगर चढती सी बेलन जी
      म्हारी मालण फुलडा से लाय |

      सूरज जी थाको आरत्यों जी
      चन्द्रमा जी थाको आरत्यो जी

      ब्रह्मा जी थाको आरत्यो जी
      ईसर जी थाको आरत्यो जी

      थाका आरतिया में आदर मेलु पादर मेलू

      पान की पचास मेलू
      पीली पीली मोहरा मेलू ,

      रुपया मेलू डेड सौ सुपारी मेलू ,
      मोतीडा रा आखा मेलू

      राजा जी रो सुवो मेलू ,
      राणी जी री कोयल मेलू

      करो न भाया की बहना आरत्यो जी
      करो न सायब की गौरी आरत्यो जी

      गणगौर पूजा की आरती- (Gangaur Puja Aarti )

      नीव ढलती बेलड़ी जी

      मालन फुलड़ा सा ल्याय, ईसरदास थारो कोटडया जी

      मालन फुलड़ा सा ल्याय, कानीराम थारो आरती जी

      आरतडदात धाम सुपारी लागी डोड़ा स जी

      डोड़ा राज कोट चिणाए, झीलो म्हारी चूनड़ी जी

      गायां जाई छ ठाणम जी, बहुवां जाई छ साल, झीलो म्हारी चूनड़ी जी

      गायां जाया बाछड़ा जी, बहूवां जाया छ पूत, झीलो म्हारी चूनड़ी जी

      गायां खाया खोपरा जी बहूवां खाई छ सूट, झीलो म्हारी चूनड़ी जी

      गायां क गल घूघरा जी बहूवां कागल हार, झीलो म्हारी चूनड़ी जी

      गोरल जायो द पूत जी कुण खिलायगी जी, खिलासी रोवां ननद झाबर क पालण जी

      आँख मोड़ नाक मोड़ कड़ मोड़ घूमर घाल,बाड़ी न रुन्दल जी

      बाड़ी म लाल किवाड़, झीली म्हारी चूनड़ी जी, आवगा ब्रह्मदासजी रा पूत पाजोव थारी मन राली जी

      माता पार्वती की आरती: जय पार्वती माता

        भगवान शिव के साथ माता पार्वती की स्तुति के बिना यह पर्व अधूरा है। "जय पार्वती माता, ब्रह्म सनातन देवी शुभ फल की दाता…" का गान करने से घर में सुख-शांति और ऐश्वर्य का वास होता है।

        जय पार्वती माताजय पार्वती माता।
        ब्रह्म सनातन देवीशुभ फल की दाता॥

        जय पार्वती माता
        अरिकुल पद्म विनाशिनिजय सेवक त्राता।
        जग जीवन जगदम्बा,हरिहर गुण गाता॥

        जय पार्वती माता
        सिंह को वाहन साजे,कुण्डल हैं साथा।
        देव वधू जस गावत,नृत्य करत ताथा॥

        जय पार्वती माता
        सतयुग रूपशील अतिसुन्दर,नाम सती कहलाता।
        हेमांचल घर जन्मी,सखियन संग राता॥

        जय पार्वती माता
        शुम्भ निशुम्भ विदारे,हेमांचल स्थाता।
        सहस्र भुजा तनु धरि के,चक्र लियो हाथा॥

        जय पार्वती माता
        सृष्टि रूप तुही हैजननी शिवसंग रंगराता।
        नन्दी भृंगी बीन लहीसारा जग मदमाता॥

        जय पार्वती माता
        देवन अरज करतहम चित को लाता।
        गावत दे दे ताली,मन में रंगराता॥

        जय पार्वती माता
        श्री प्रताप आरती मैया की,जो कोई गाता।
        सदासुखी नित रहतासुख सम्पत्ति पाता॥

        जय पार्वती माता

        गणगौर से जुड़ी कुछ खास बातें

        मिट्टी के गणगौर का महत्व: इस दिन मिट्टी से ईसर और गौर की मूर्तियां बनाई जाती हैं। कई परिवारों में ये मूर्तियां पीढ़ी दर पीढ़ी धातु की भी होती हैं, जिन्हें हर साल सजाया जाता है।

        घेवर का भोग: गणगौर के त्यौहार पर 'घेवर' का विशेष महत्व है। माता को घेवर और गुने (एक विशेष मीठा पकवान) का भोग लगाया जाता है।

        16 दिन का उत्सव: वैसे तो मुख्य पूजा तृतीया को होती है, लेकिन इसकी तैयारी होली के अगले दिन से ही शुरू हो जाती है। महिलाएं 16 दिनों तक गीत गाती हैं और गौर पूजती हैं।

        विसर्जन की परंपरा: पूजा के अंतिम दिन गाजे-बाजे के साथ गणगौर की सवारी निकाली जाती है और फिर किसी पवित्र जलाशय या बावड़ी में मूर्तियों का विसर्जन (विदाई) किया जाता है।

        गणगौर का त्यौहार रिश्तों में मिठास और परिवार में खुशहाली लाने का प्रतीक है। यदि आप भी इस वर्ष गणगौर पूज रही हैं, तो इन आरतियों को श्रद्धापूर्वक गाएं और माता गौरी से अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद पाएं।

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        Published on:
        21 Mar 2026 04:33 pm
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