धर्म और अध्यात्म

रामायण के वे दमदार पात्र जो महाभारत काल में भी रहे मौजूद

इनके बिना दोनों महाकाव्यों लगते हैं अधूरे !

3 min read
Apr 20, 2020
Mahabharata after Ramayana Mythological characters who present in both

रामायण और महाभारत सनातन धर्म के दो प्रमुख ग्रंथ हैं, जिनके बिना हिन्दु-धर्म या सनातन संस्कृति की चर्चा हो ही नहीं सकती। ऐसे में रामायण के हर पात्र का अपना एक अहम रोल रहा है, लेकिन क्या आप इस महाकाव्य के उन सभी पौराणिक पात्रों के बारे में जानते हैं, जिन्होंने न केवल रामयण में बल्कि महाभारत में भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

पंडित सुनील शर्मा के अनुसार ये वे पौराणिक पात्र या यूं कहे महान लोग हैं जिनके के बिना न तो रामायण की चर्चा पूरी हो सकती है और न ही महाभारत का ज्ञान। आज हम आपको उन्हीं पौराणिक पात्रों के बारे में बता रहे हैं, जिनके बिना ये दोनों ही महाकाव्य अधूरे से लगते हैं...

1. मयासुर या मयदानव
बहुत ही कम लोग जानते होंगे की रावण के ससुर यानी मंदोदरी के पिता मयासुर एक ज्योतिष तथा वास्तुशास्त्र थे। इन्होंने ही महाभारत में युधिष्ठिर के लिए सभाभवन का निर्माण किया जो मयसभा के नाम से प्रसिद्ध हुआ। इसी सभा के वैभव को देखकर दुर्योधन पांडवों से ईर्ष्या करने लगा था और कहीं न कहीं यही ईर्ष्या महाभारत में युद्ध का कारण बनी।

2. महर्षि दुर्वासा
महान ऋषि महर्षि दुर्वासा रामायण में एक बहुत ही बड़े भविष्यवक्ता थे। इन्होंने ही रघुवंश के भविष्य सम्बंधी बहुत सारी बातें राजा दशरथ को बताई थी। वहीं दूसरी तरफ महाभारत में भी पांडव के निर्वासन के समय महर्षि दुर्वासा द्रोपदी की परीक्षा लेने के लिए अपने दस हजार शिष्यों के साथ उनकी कुटिया में पंहुचें थे।

3. परशुराम
अपने समय के सबसे बड़े ज्ञानी परशुराम को कौन नहीं जानता। माना जाता है कि परशुराम ने 21 बार क्षत्रियों को पृथ्वी से नष्ट कर दिया था। रामायण में उनका वर्णन तब आता है जब राम सीता के स्वंयवर में शिव का धनुष तोड़ते है जबकि महाभारत में वो भीष्म के गुरु बनते है तथा एक वक़्त भीष्म के साथ भयंकर युद्ध भी करते है। इसके अलावा वो महाभारत में कर्ण को भी ज्ञान देते है।

4. हनुमान
रामायण में प्रमुख भूमिका निभाने वाले भगवान हनुमान महाभारत में महाबली भीम से पांडव के वनवास के समय मिले थे। कई जगह तो यह भी कहा गया है कि भीम और हनुमान दोनों भाई हैं, क्योंकि भीम और हनुमान दोनों ही पवन देव के पुत्र थे।

5. जाम्बवंत
रामायण में जाम्बवंत का वर्णन राम के प्रमुख सहयोगी के रूप में मिलता है। जाम्बवन्त ही राम सेतु के निर्माण में प्रमुख भूमिका निभाते है। जबकि महाभारत में जाम्बवन्त, भगवान श्री कृष्ण के साथ 27 दिनों तक युद्ध करते हैं, किसी की हार जीत नहीं होने पर उन्हें यह पता चलता हैं कि श्रीकृष्ण, श्रीराम की ही तरह भगवान विष्णु के अवतार है, जिसके बाद वे अपनी बेटी जामवंती का विवाह श्रीकृष्ण के साथ कर देते है।

वहीं इनमें से तीन पौराणिक पात्र तो चिरंजीवी यानि अमर माने जाते हैं, जिनमें हनुमान, जाम्बवंत और परशुराम शामिल हैं।

Published on:
20 Apr 2020 03:35 pm
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