Mantra Jaap Ke Niyam : मंत्र केवल शब्द नहीं, बल्कि ऊर्जा और चेतना का विज्ञान हैं। सही मंत्र, सही विधि और सही भावना से किया गया जप जीवन को सकारात्मक दिशा में बदल सकता है। लेकिन मंत्रों का प्रयोग सदैव शुद्ध भावना और सही मार्गदर्शन के साथ ही करना चाहिए।
Mantra Chanting Rules : भारतीय सनातन परंपरा में मंत्रों का विशेष स्थान है। मंत्र केवल धार्मिक शब्द नहीं हैं, बल्कि यह ध्वनि-विज्ञान (Sound Science) और ऊर्जा (Energy) से जुड़ी एक गहन प्रक्रिया है। शास्त्रों में कहा गया है—
“मनात् तारति इति मंत्रः”
अर्थात जो मन को तार दे, उबार दे, वही मंत्र है। मंत्र कुछ विशेष अक्षरों और ध्वनियों की ऐसी संरचना होते हैं, जिनका विधि-विधान से जप करने पर जीवन में शांति, सफलता, स्वास्थ्य और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।
आमतौर पर लोग मंत्र को लंबे श्लोक या जटिल रिचाएं समझ लेते हैं, जबकि वास्तव में राम, हरि, राधा, शिव जैसे नाम भी पूर्ण मंत्र हैं। इन्हें नाम मंत्र कहा जाता है, जिनका जप श्वास-प्रश्वास के साथ भी किया जा सकता है।
वहीं दूसरी ओर बीज मंत्र होते हैं, जैसे— “ॐ शं शनैश्चराय नमः”। इसमें “शं” बीजाक्षर है, जो विशेष ग्रह ऊर्जा को सक्रिय करता है।
मंत्र दो प्रकार के माने गए हैं—
एक वे मंत्र, जिनका जप कोई भी कर सकता है, और दूसरे वे मंत्र, जो दीक्षा के माध्यम से गुरु द्वारा व्यक्तिगत रूप से दिए जाते हैं, जो व्यक्ति के स्वभाव और संस्कारों के अनुसार होते हैं।
हर अक्षर के भीतर एक रंग और एक तरंग (Vibration) होती है। उसी तरह हर व्यक्ति की भी अपनी ऊर्जा तरंग होती है। जब मंत्र की ध्वनि व्यक्ति की आंतरिक तरंगों से मेल खा जाती है, तब उसका प्रभाव शुरू होता है।
मंत्र सबसे पहले शरीर पर असर डालते हैं, फिर मन पर और अंततः आत्मा पर। यह प्रभाव शरीर में स्थित चक्रों (Chakras) के माध्यम से होता है। इसी कारण हर व्यक्ति के लिए एक ही मंत्र समान रूप से प्रभावी नहीं होता।
मंत्र जप के लिए एक ही स्थान, एक ही समय और एक ही आसन सर्वोत्तम माना गया है। पूर्णिमा या अमावस्या से मंत्र जप आरंभ करना शुभ होता है। सफेद या काले रंग का सूत, कुश या ऊन का आसन प्रयोग करना लाभकारी है।
जप के समय रीढ़ की हड्डी सीधी रखें और रुद्राक्ष या चंदन की माला का उपयोग करें। मंत्र जप के बाद कम से कम 10 मिनट तक जल का स्पर्श न करें।
ध्यान रखें, गलत मंत्र या इंटरनेट पर उपलब्ध अप्रमाणिक मंत्रों का जप नुकसान भी पहुंचा सकता है। इसलिए किसी आचार्य या प्रमाणिक ग्रंथ से मंत्र की पुष्टि अवश्य करें।
अगर आप चाहते हैं कि धन का प्रवाह लगातार बना रहे, तो अपने पर्स में सोने या पीतल का छोटा चौकोर टुकड़ा रखें। प्रातः भगवान कृष्ण को पीला फूल अर्पित करें और घर से निकलते समय वही फूल अपने पास रखें। इससे दिनभर के कार्यों में सफलता मिलने की मान्यता है।