Mohini Ekadashi 2022 Rules: इस साल 2022 में मोहिनी एकादशी व्रत पर 12 मई को गुरुवार के दिन राजयोग बन रहा है। ऐसे में पूजा और व्रत का संपूर्ण फल प्राप्त करने के लिए इन नियमों का पालन करना जरूरी माना जाता है...
Mohini Ekadashi 2022 Fast Rules: हर महीने कृष्ण और शुक्ल पक्ष की दो एकादशी पड़ती हैं। वैशाख मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मोहिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है इस साल 2022 में मोहिनी एकादशी का व्रत 12 मई को गुरुवार के दिन पड़ रहा है और इस दिन ग्रहों का भी एक विशेष सहयोग बन रहा है। मोहिनी एकादशी को सभी एकादशियों में सर्वोत्तम माना जाता है। ऐसे में इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत से उनका खास आशीर्वाद प्राप्त होता है। तो आइए जानते हैं व्रत की कौन से नियमों का पालन करने से पूजा का संपूर्ण फल प्राप्त होता है...
1. मोहिनी एकादशी का व्रत करने वाले लोगों को इससे एक दिन पहले यानी दशमी तिथि को लहसुन, प्याज, मांसाहार और मसूर की दाल का सेवन नहीं करना चाहिए।
2. मोहिनी एकादशी के दिन लकड़ी का दातुन करना भी सही नहीं माना जाता। इस दिन आप सुबह जामुन, आम या नींबू के पत्तों को चबाकर कुल्ला करके अपना मुंह साफ कर सकते हैं। साथ ही ध्यान रखें कि आपको दातुन के लिए पेड़ से पत्ता भी नहीं तोड़ना है, बल्कि नीचे गिरे हुए पत्तों को धोकर चबाकर दातुन कर सकते हैं।
3. शास्त्रों के अनुसार एकादशी का व्रत द्वादशी तिथि में खोला जाता है। साथ ही ध्यान रखें कि द्वादशी तिथि को सूर्योदय के बाद ही व्रत का पारण किया जाता है। इस साल 2022 में आप 13 मई के दिन सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर और भगवान विष्णु की पूजा के बाद व्रत खोल सकते हैं।
4. माना जाता है कि एकादशी के दिन घर में झाड़ू भी नहीं लगानी चाहिए क्योंकि इससे सूक्ष्म जीवों जैसे चींटी आदि की मृत्यु हो सकती है और फिर पाप चढ़ता है।
5. मोहिनी एकादशी के दिन ओम नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें और साथ ही राम, कृष्ण और विष्णु भगवान के सहस्त्रनाम का पाठ करना भी बहुत फलदायी माना जाता है।
6. मोहिनी एकादशी के दिन अपने सामर्थ्य अनुसार दान करना भी शुभ माना जाता है। वहीं इस दिन किसी के द्वारा दिया हुआ अन्न ग्रहण करने की भी मनाही है।
7. मोहिनी एकादशी के व्रत का पारण करने के दौरान आप केला, बादाम, आम और अंगूर आदि का सेवन कर सकते हैं।
8. शास्त्रों के अनुसार द्वादशी तिथि के दिन अपनी सामर्थ्य अनुसार ब्राह्मणों को दान-दक्षिणा और मिष्ठान की वस्तुएं देने का भी विधान है।
(डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई सूचनाएं सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। patrika.com इनकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ की सलाह लें।)
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