
Nag Panchami 2026 Puja Vidhi: इस बार सावन माह में करीब 23 साल बाद ऐसा दुर्लभ संयोग बन रहा है, जब नागपंचमी (Nag Panchami 2026) सोमवार के दिन पड़ रही है। सोमवार को नागपंचमी होने के कारण इसे सोमवती नागपंचमी कहा जा रहा है। इस विशेष संयोग को लेकर शिव भक्तो में खास उत्साह है और देश के प्रमुख शिव मंदिरो में विशेष पूजा-अर्चना की तैयारियां की जा रही है। सावन का तीसरा सोमवार नाग पंचमी को सावन माह में सोमवार का विशेष महत्व माना जाता है।
भगवान शिव को समर्पित पक्किा सावन माह में देशभर के शिवालयों में श्रद्धा और भक्ति का वातावरण बना हुआ है। सुबह से ही श्रद्धालु मंदिरों में पहुंचकर भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और पूजा अर्चना कर रहे हैं। पं. योगेंद्र चतुर्वेदी के अनुसार सावन में नागपंचर्मी का सोमवार के दिन पड़ना धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। श्रद्धालु भगवान शिव को जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और पुष्प अर्पित कर पूजा करेंगे। नाग देवता की पूजा कर परिवार की सुख-समृद्धि और मंगल की कामना भी की जाएगी।
सोमवती नागपंचमी (Somvati Nag Panchami) के अवसर पर श्रद्धालु शिव आराधना के साथ नाग देवता की पूजा भी करेंगे। नागपंचमी पर नाग देवता की पूजा करने से सर्प भय से मुक्ति और परिवार की सुख-शांति की कामना पूरी होने का विश्वास है। वहीं सावन सोमवार को भगवान शिव की पूजा करने से मनोकामनाओं की पूर्ति और पुण्य लाभ मिलने की धार्मिक मान्यता है।
सावन माह का समापन 28 अगस्त को सावन पूर्णिमा के साथ होगा। इसी दिन रक्षाबंधन का पर्व भी मनाया जाएगा। सावन के पूरे महीने श्रद्धालु शिव आराधना में लीन रहेंगे। मंदिरों में जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना का दौर जारी रहेगा। कांवड़िए भी विभिन्न स्थानों से पवित्र जल लेकर शिवालयों में पहुंचकर भगवान भोलेनाथ का अभिषेक करेंगे। सावन में शिव उपासना का विशेष महत्व माना गया है। पूरे माह भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए व्रत रखते हैं और सुबह-शाम मंदिरों में पूजा-अर्चना करते हैं सोमवार को पड़ रही नागपंचमी ने सावन की आस्था को और विशेष बना दिया है।