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Hariyali Amavasya: बन रहे 4 शुभ योग, 21 साल बाद ऐसा संयोग, जानें किस समय करें पूजा और पितरों को तर्पण

Hariyali Amavasya 2026: हरियाली अमावस्या इस बार बेहद खास मानी जा रही है। 21 साल बाद बने दुर्लभ ग्रह-नक्षत्र संयोग में शिव पूजा, पितृ तर्पण और पौधारोपण से विशेष फल मिलने की मान्यता है।
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भारत

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Akash Dewani

Aug 10, 2026

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Hariyali Amavasya 2026: जानें किस समय करें पूजा और पितरों को तर्पण (फोटो सोर्स- Chatgpt)

Hariyali Amavasya Puja : धर्म और प्रकृति के अनूठे संगम का त्योहार हरियाली अमावस्या इस बार 12 अगस्त को मनाया जाएगा। विशेष बात ये है कि इस बार हरियाली अमावस्या 12 अगस्त को पुष्य नक्षत्र, गौरी योग, गजकेसरी योग और सर्वार्थ सिद्धि योग जैसे अत्यंत शुभ संयोगों के साथ मनाई जाएगी। इस दिन भगवान शिव की पूजा, पवित्र स्नान, पितृ तर्पण और पौधे लगाने का विशेष विधान है। जिससे जीवन में सुख-शांति आती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार 21 वर्ष बाद ग्रह-नक्षत्रों का दुर्लभ संयोग बन रहा है।

हरियाली अमावस्या महादेव की कृपा और पितरों के तर्पण के लिए शुभमानी जाती है। उल्लेखनीय है कि वैदिक पंचांग के अनुसार, सावन के महीने की शुरुआत 30 जुलाई से हुई है। यह महीना महादेव की कृपा प्राप्त करने के लिए शुभ माना जाता है। इस माह हरियाली अमावस्या का पर्व भी शामिल है। इस खास अवसर पर पितरों का तर्पण और महदेव की पूजा-अर्चना करने का अधिक महत्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, पितरो का तर्पण करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है और शिव जी की साधना करने से जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।

11 अगस्त दोपहर से शुरू होगी अमावस्या

वैदिक पंचांग के अनुसार, सावन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि की शुरुआत 11 अगस्त को दोपहर 03 बजकर 22 मिनट पर होगी। वहीं, इस तिथि का समापन 12 अगस्त को 12 बजकर 36 मिनट पर होगा। ऐसे में 12 अगस्त को हरियाली अमावस्या मनाई जाएगी। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग रात 09 बजकर 29 मिनट से 06 बजकर 06 मिनट तक रहेगा। पुष्य नक्षत्र में चंद्रमा कर्क राशि में रहेंगे, जिससे गौरी योग बनेगा। चंद्रमा बृहस्पति की स्थिति से गजकेसरी योग के साथ सर्वार्थ सिद्धि और शिववास योग भी बनेंगे।

हरियाली अमावस्या का धार्मिक महत्व

हरियाली अमावस्या के अवसर पर पेड़-पौधे लगाना अधिक शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन सुबह स्नान करने के बाद देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है और ग्रहों के अशुभ प्रभाव दूर होता है। इसके अलावा इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का विधान है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, शिव की साधना करने से जीवन में सुख-शांति का आगमन होता है और महादेव की कृपा प्राप्त होती है। हरियाली अमावस्या के दिन पितृ दोष से मुक्ति पाने के लिए पितरों का तर्पण और श्रद्ध जरूर करना चाहिए। इससे पितृ दोष की समस्या दूर होती है।

पूजा करने का सही समय

पूजन के लिए विशेष मुहूर्त- ब्रह्म मुहूर्त 04:36 से 05:21 बजे, विजय मुहूर्त 02:39 से 03:30 बजे और गोधूलि मुहूर्त 06:56 से 07:18 बजे तक रहेगा। सर्वार्थ सिद्धि योग रात 09:29

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