Shadi Ke Shubh Muhurat 2026 : खरमास समाप्त हो चुका है और 15 अप्रैल से शादी-ब्याह के शुभ मुहूर्त शुरू हो रहे हैं। अप्रैल से दिसंबर 2026 तक सभी विवाह तिथियों, मलमास और चातुर्मास की पूरी जानकारी यहां पढ़ें।
Shadi Ke Shubh Muhurat 2026 : भारतीय परंपराओं में शादी-ब्याह का समय सिर्फ कैलेंडर से नहीं, बल्कि ग्रह-नक्षत्रों से तय होता है। लंबे इंतजार के बाद अब वह पल आ गया है जिसका हर परिवार बेसब्री से इंतजार कर रहा था खरमास समाप्त हो चुका है, और 15 अप्रैल से एक बार फिर शुभ कार्यों की शुरुआत होने जा रही है।
खरमास तब शुरू होता है जब सूर्य मीन राशि में प्रवेश करता है। इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाता है। इस बार यह अवधि 14 मार्च से शुरू होकर 14 अप्रैल तक रही।
ज्योतिष के अनुसार, 14 अप्रैल को सुबह 11:45 बजे सूर्य मेष राशि में प्रवेश करेगा, जो उसकी उच्च राशि मानी जाती है। जैसे ही यह बदलाव होगा, शुभ कार्यों के लिए रास्ते खुल जाएंगे।
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खरमास खत्म होते ही शादी का सीजन जोर पकड़ लेगा। 15 अप्रैल से 14 मई के बीच कुल 16 शुभ विवाह तिथियां उपलब्ध हैं। इस दौरान बाजारों में रौनक, बैंड-बाजों की आवाज़ और खुशियों की बहार देखने को मिलेगी।
अप्रैल की शुभ तिथियां:
15, 20, 21, 25, 26, 27, 28, 29
मई की शुभ तिथियां:
1, 3, 5, 6, 7, 8, 13, 14
17 मई से 15 जून तक एक बार फिर शादियों पर ब्रेक लग जाएगा। इस दौरान ज्येष्ठ मलमास (अधिक मास) रहेगा, जिसे धार्मिक दृष्टि से अशुभ माना जाता है।
मलमास हर 32 महीने में आता है, ताकि चंद्र और सौर कैलेंडर के बीच संतुलन बना रहे। इस दौरान भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व होता है।
मलमास खत्म होने के बाद 21 जून से 12 जुलाई के बीच फिर से शादी के लिए 12 शुभ मुहूर्त मिलेंगे।
जून की तिथियां:
21, 22, 23, 24, 25, 26, 27, 29
जुलाई की तिथियां:
1, 6, 7, 11, 12
25 जुलाई से चातुर्मास शुरू होगा, जो चार महीने तक चलता है। इस दौरान भी विवाह और बड़े आयोजन नहीं किए जाते। यह समय आध्यात्म और साधना के लिए श्रेष्ठ माना जाता है।
अगर आप बीच में तारीख मिस कर दें, तो चिंता नहीं! नवंबर और दिसंबर में फिर से शानदार मुहूर्त मिलेंगे
नवंबर: 21, 24, 25, 26
दिसंबर: 2, 3, 4, 5, 6
भारतीय संस्कृति में शादी सिर्फ दो लोगों का नहीं, बल्कि दो परिवारों का मिलन है। इसलिए ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति को ध्यान में रखकर मुहूर्त तय किया जाता है, ताकि वैवाहिक जीवन सुखमय और संतुलित रहे। आजकल भले ही लोग अपनी सुविधा के अनुसार तारीख तय करने लगे हैं, लेकिन ज्योतिषीय मान्यताओं का महत्व अभी भी बरकरार है, खासकर पारंपरिक परिवारों में।