Shani Jayanti Date 2026 : 16 मई को शनि जयंती पर दुर्लभ ज्योतिषीय संयोग बन रहा है। शनिवार को पड़ रही जयंती के साथ वट अमावस्या, शोभन और सौभाग्य योग भी रहेंगे। जानिए किन राशियों पर रहेगा असर और क्या करें उपाय।
Shani Jayanti 2026 : जयपुर। सूर्यपुत्र और न्यायाधिपति शनिदेव का प्राकट्योत्सव 16 मई को मनाया जाएगा। ज्योतिषविदों के मुताबिक 20 साल में यह चौथा अवसर होगा जब न्याय के देवता की जयंती (Shani Jayanti) शनिवार को मनाई जाएगी। शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या और महादशा के निवारण के लिए जातक कई उपाय भी करेंगे। शहर स्थापना से लेकर विभिन्न कॉलोनियों में बने शनि मंदिरों में शनिदेव की प्रतिमा का तैलाभिषेक और महायज्ञ होगा। वट अमावस्या ( वट सावित्री व्रत) भी इसी दिन होने से महिलाएं अखंड सौभाग्य की कामना के लिए वट वृक्ष की पूजा और परिक्रमा करेंगी।
एमआई रोड, आकाशवाणी कार्यालय स्थित शनिधाम मंदिर के महंत मगन गौड़ ने बताया कि शहर स्थापना के समय के मंदिर में सुबह से तैलाभिषेक का सिलसिला शुरू होगा। शाम 7.15 बजे महाआरती, भजन संध्या और प्रसादी होगी। बाबा बर्फानी की झांकी के साथ ही शनिदेव का श्रृंगार होगा। इस दिन नक्षत्र भरणी, इसके बाद कृतिका रहेगा। साथ ही शोभन व सौभाग्य योग रहेंगे। इन योगों में जयंती मनाना अति शुभफलदायी रहेगा।
वर्तमान में मीन राशि में शनि ग्रह गतिशील हैं। शनि की ढैय्या व साढ़ेसाती से कई राशियां प्रभावित हो रही हैं। सरसों के तेल का अभिषेक, शनि चालीसा का पाठ और काले चीजों का दान करें।
डॉ. महेश शर्मा, ज्योतिषाचार्य
जातकों पर उतरती साढ़े साती होने से इन्हें आर्थिक लाभ व सुख-समृद्धि की प्राप्ति होगी। रुके हुए कार्यों को गति मिलेगी।
साढ़े साती का मध्य चरण है। जातकों को संघर्ष, कठिन परिश्रम के बाद ही सफलता संभव है। स्वास्थ्य और व्यय के प्रति सजग रहें।
चढ़ती हुई साढ़े साती होने से इस राशि के जातकों के लिए यह समय चुनौतीपूर्ण रहेगा। विशेष सावधानी बरतने की जरूरत।
दोनों राशि के जातकों पर शनि की ढैय्या प्रभावी है। इसके प्रभाव से मानसिक तनाव और कार्यक्षेत्र में व्यवधान की स्थिति बन सकती है।
मानसरोवर, टोंक रोड, सीकर रोड, वैशाली नगर, जगतपुरा, मालवीय नगर, सिरसी रोड, दिल्ली रोड सहित अन्य जगहों पर बीते दो दशक पहले जहां 30 शनिदेव मंदिर थे। जयपुर में नई कॉलोनियां, टाउनशिप और आवासीय क्षेत्र तेजी से विकसित होने के साथ ही सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक कारणों के चलते भी 500 से अधिक शनि मंदिर हैं।