धर्म और अध्यात्म

ये है संतोषी माता की फैमिली ट्री, जानें कौन हैं दादा और कौन हैं दादी

सुखदाता भाग्य विधाता जय करना संतोषी मां।
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Feb 09, 2018
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नई दिल्ली। संतोषी माता हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एक देवी हैं जिनका शुक्रवार का व्रत किया जाता है। संतोषी माता के पिता का नाम गणेश और माता का नाम रिद्धि-सिद्धि है। संतोषी माता के पिता गणेश और माता रिद्धि-सिद्धि धन, धान्य, सोना, चांदी, मूंगा, रत्नों और ज्ञान से भरा पूरा परिवार है। इसलिए उनकी प्रसन्न करके ये फल मिलता है कि वो परिवार में सुख-शांति और मनोंकामनाओं की पूरा कर शोक, विपत्ति, चिंता परेशानियों को दूर कर देती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सुख-सौभाग्य की कामना के लिए माता संतोषी के 16 शुक्रवार तक व्रत किए जाने का विधान है।

मां संतोषी ,संतोष की देवी हैं। मां संतोषी प्रेम, संतोष, क्षमा, खुशी और आशा की प्रतिक हैं जो उनके शुक्रवार की व्रत कथा में कहा गया है। यह बहुत माना जाता है की लगातार 16 शुक्रवार को व्रत और प्रार्थना करने से भक्तों के जीवन में शांति और समृद्धि व्याप्त हो जाती है। मां संतोषी व्यक्ति को पारिवारिक मूल्यों का और दृढ़ संकल्प के साथ संकट से बाहर आने के लिए प्रेरित करती हैं। संतोषी मां भी मां दुर्गा का ही अवतार मानी जाती हैं और व्यापक रूप से पुरे भारत में और भारत के बाहर भी पूजी जाती हैं।

आइए जानते हैं इनके परिवार के बारे में-

दादाजी- भगवान शिव
दादीजी- देवी पार्वती
पिता- भगवान गणेश
मां- या तो रिद्धी या सिद्धी
भाई- शुभ और लाभ

इन्हें प्रसन्न करने का श्लोक-

सुखदाता भाग्य विधाता जय करना संतोषी मां।
गए ग्नता गन बुध गता ऋद्धि सिद्धि दाता॥
शुभ होव तुज नाम ही लेते, सहाय को मां प्रेम से आये।
संतोषी मां मंगल करना, तुज व्रत करके सब हरखाये॥

आपको बता दें दिल्ली में हरि नगर बस डिपो के पास स्थित संतोषी माता का मंदिर सबसे प्रसिद माता मंदिरों में से एक है। मंदिर में दिल्ली एनसीआर से बड़ी संख्या में लोग नवरात्र के दौरान आते हैं और मां से आशीष लेते हैं। मंदिर में इस बार 91वें नवरात्र मेले की आयोजन किया जाता है। खराब मौसम के बावजूद यहां न तो भक्तों के उत्साह में कोई कमी आती है और न ही उनकी संख्या में। मंदिर लगभग 100 साल पुराना है। जैसे-जैसे भक्तों के बीच इसकी मान्यता बढ़ती गई, मंदिर का स्वरूप भी बदलता गया।

यहां नवरात्र के समय भक्तों की भीड़ चरम पर होती है। मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां कोई पुजारी नहीं है। हर मंगलवार को मां वैष्णो देवी और हर रविवार को संतोषी माता की यहां चौकी होती है। नवरात्र के दौरान रात 2 बजे तक दुर्गा सप्तसती का पाठ होता है। श्रद्धालुओं की मदद के लिए यहां 900 सेवादार हैं। दोपहर 3 बजे से रात 10 बजे तक भंडारा होता है। यहां एक पीपल का पेड़ है, इस पीपल के पेड़ पर चुनारी बांधने से हर मुरादें पूरी होती हैं।