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Nirjala Ekadashi Aarti 2026: भगवान विष्णु आरती के बिना अधूरी मानी जाती है निर्जला एकादशी की पूजा

Nirjala Ekadashi 2026 पर भगवान विष्णु की पूजा के दौरान पढ़ी जाने वाली विशेष आरती, व्रत का महत्व और पूजा विधि जानें। धार्मिक मान्यता है कि इस एकादशी का व्रत सभी एकादशियों के बराबर पुण्य प्रदान करता है।
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भारत

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Manoj Vashisth

Jun 24, 2026

Nirjala Ekadashi Aarti Lyrics

Nirjala Ekadashi Aarti 2026 : निर्जला एकादशी आरती हिंदी में (फोटो सोर्स : AI@chatgpt)

Nirjala Ekadashi Aarti Lyrics: ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की निर्जला एकादशी को भगवान विष्णु की पूजा और व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूजा के दौरान विष्णु आरती का पाठ करना शुभ माना जाता है। यदि आप निर्जला एकादशी (Nirjala Ekadashi 2026) व्रत कर रहे हैं, तो यहां पढ़ें भगवान विष्णु की आरती।

एकादशी की हिंदी आरती, Nirjala Ekadashi Hindi Aarti Lyrics, Nirjala Ekadashi Vrat Aarti in hindi

॥ श्री एकादशी माता की आरती ॥

ॐ जय एकादशी, जय एकादशी, जय एकादशी माता ।
विष्णु पूजा व्रत को धारण कर, शक्ति मुक्ति पाता ।। ॐ जय…।।

तेरे नाम गिनाऊं देवी, भक्ति प्रदान करनी ।
गण गौरव की देनी माता, शास्त्रों में वरनी ।। ॐ ।।

मार्गशीर्ष के कृष्णपक्ष की उत्पन्ना, विश्वतारनी जन्मी।
शुक्ल पक्ष में हुई मोक्षदा, मुक्तिदाता बन आई।। ॐ जय…।।

पौष के कृष्णपक्ष की, सफला नामक है,
शुक्लपक्ष में होय पुत्रदा, आनन्द अधिक रहै ।। ॐ ।।

नाम षटतिला माघ मास में, कृष्णपक्ष आवै।
शुक्लपक्ष में जया, कहावै, विजय सदा पावै ।। ॐ जय…।।

विजया फागुन कृष्णपक्ष में शुक्ला आमलकी,
पापमोचनी कृष्ण पक्ष में, चैत्र महाबलि की ।। ॐ ।।

चैत्र शुक्ल में नाम कामदा, धन देने वाली,
नाम बरुथिनी कृष्णपक्ष में, वैसाख माह वाली ।। ॐ ।।

शुक्ल पक्ष में होय मोहिनी अपरा ज्येष्ठ कृष्णपक्षी,
नाम निर्जला सब सुख करनी, शुक्लपक्ष रखी।। ॐ जय…।।

योगिनी नाम आषाढ में जानों, कृष्णपक्ष करनी।
देवशयनी नाम कहायो, शुक्लपक्ष धरनी ।। ॐ ।।

कामिका श्रावण मास में आवै, कृष्णपक्ष कहिए।
श्रावण शुक्ला होय पवित्रा आनन्द से रहिए।। ॐ जय…।।

अजा भाद्रपद कृष्णपक्ष की, परिवर्तिनी शुक्ला।
इन्द्रा आश्चिन कृष्णपक्ष में, व्रत से भवसागर निकला।। ॐ ।।

पापांकुशा है शुक्ल पक्ष में, आप हरनहारी।
रमा मास कार्तिक में आवै, सुखदायक भारी ।। ॐ जय…।।

देवोत्थानी शुक्लपक्ष की, दुखनाशक मैया।
पावन मास में करूं विनती पार करो नैया ।। ॐ ।।

परमा कृष्णपक्ष में होती, जन मंगल करनी।।
शुक्ल मास में होय पद्मिनी दुख दारिद्र हरनी ।। ॐ जय…।।

जो कोई आरती एकादशी की, भक्ति सहित गावै।
जन गुरदिता स्वर्ग का वासा, निश्चय वह पावै।। ॐ जय…।।

अस्वीकरण (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। यहाँ दी गई ज्योतिष, वास्तु या धार्मिक जानकारी मान्यताओं और विभिन्न स्रोतों पर आधारित है। हम इसकी पूर्ण सटीकता या सफलता की गारंटी नहीं देते हैं। किसी भी उपाय, सलाह या विधि को अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के प्रमाणित विशेषज्ञ या विद्वान से परामर्श अवश्य लें।