
Nirjala Ekadashi Daan : निर्जला एकादशी पर क्या दान करें (फोटो सोर्स: AI@Gemini)
Nirjala Ekadashi 2026 Ghada Daan: निर्जला एकादशी हिंदू धर्म में सबसे महत्वपूर्ण एकादशियों में मानी जाती है। इस दिन जल दान और घड़ा दान का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि भीषण गर्मी के बीच प्यासे लोगों को जल उपलब्ध कराना पुण्यदायी माना जाता है। यदि आप निर्जला एकादशी (Nirjala Ekadashi 2026) पर घड़ा दान, जल दान और पूजा विधि जानना चाहते हैं, तो यहां पूरी जानकारी दी जा रही है।
यह कहानी किसी कठिन तपस्या की नहीं, बल्कि ज्येष्ठ मास की उस तपती दोपहर और भीषण गर्मी के प्रकोप की है, जहां आस्था केवल भूखे-प्यासे रहने में नहीं, बल्कि प्यासे को कंठ तक तृप्त करने में छिपी है। चलिए चलते हैं निर्जला एकादशी (Nirjala Ekadashi 2026) की उस अनोखी यात्रा पर, जहां आपके घर का किचन भी एक पवित्र मंदिर बन जाता है।
सुबह-सुबह स्नान इत्यादि से निवृत्त होकर, साफ और पीले रंग के वस्त्र धारण कर जब आप एक नया और कोरा घड़ा लाते हैं, तो वह सिर्फ मिट्टी का पात्र नहीं रह जाता। उसे कंठ तक जल से भरना एक भूखी आत्मा को तृप्त करने जैसा है।
पंडित प्रमोद शर्मा के अनुसार, आप चाहें तो अपने घर के मंदिर में, किचन में या फिर एक साफ जगह पर चौकी लगाकर भगवान श्री हरि विष्णु की फोटो के सामने इस घड़े को स्थापित कर सकते हैं। घड़े के कंठ पर मौली धागा (कलावा) बांधने का अपना एक नियम है, क्योंकि घड़े के कंठ को कभी खाली नहीं छोड़ा जाता। लेकिन अगर दान लेते समय लोग आनाकानी करें, तो घड़े के ऊपर थोड़ी सी मौली रख दें, जिसे बाद में उतारकर देवताओं को चढ़ा दें या अपने हाथ में बांध लें।
एक अनोखा विकल्प: अगर आप घड़े का दान नहीं कर सकते, तो निराश होने की जरूरत नहीं। आप सिर्फ जल या शरबत बनाकर भी दान कर सकते हैं। मुख्य बात इस दिन जल का दान करना है चाहे आप व्रत कर रहे हों या ना कर रहे हों!
जैसे ही आप शुद्ध देसी घी या तिल के तेल का दीपक प्रज्वलित करते हैं, धूप-दीप की खुशबू पूरे घर में फैल जाती है। रोली, चंदन और हल्दी से घड़े पर तिलक लगाया जाता है।
चावल वर्जित क्यों? चूंकि एकादशी के व्रत में चावल का उपयोग बिल्कुल नहीं होता, इसलिए तिलक के ऊपर 'तिल' समर्पित किए जाते हैं।
मीठे का संतुलन: घड़े में अगर ज्यादा मीठा डालेंगे तो वह खराब हो सकता है, इसलिए बस एक चुटकी मीठा घड़े के अंदर और बाकी चीनी या मीठा घड़े के ऊपर रख दिया जाता है।
प्रकृति का उपहार: इसके साथ ऋतुफल जैसे खरबूजा, तरबूज, ककड़ी, खीरा या आम (जो भी मिल जाए) और साथ में दक्षिणा समर्पित की जाती है, जो पूजा की कमियों को पूर्ण करती है।
इस भीषण गर्मी में अगर बांस या हाथ का पंखा मिल जाए, तो वह सबसे शुभ दान माना जाता है। इस संपूर्ण सामग्री को चढ़ाने के बाद इसे मिनस कर (हाथ में थोड़ा जल लेकर घड़े के ऊपर से दो बार वार कर) दान के लिए तैयार किया जाता है। इनमें से कोई भी चीज घर में उपयोग नहीं होती।
| दान का प्रकार | सही समय और तिथि | महत्व |
| जल और घड़ा दान | एकादशी के दिन ही (पूजा के तुरंत बाद या शाम के समय) | करोड़ों गुना पुण्य फल क्योंकि यह निर्जला एकादशी है। |
| अन्न का दान | द्वादशी तिथि के दिन (व्रत के पारण के समय) | व्रत की पूर्णता और पारण का नियम। |
इसके बाद, चाहे आपने व्रत रखा हो या न रखा हो, एकादशी की कथा सुनना बेहद पुण्यदायी है। कलश में सभी देवी-देवताओं का ध्यान कर, श्री हरि विष्णु की धूप-दीप से पूजा होती है। कथा के बाद हाथ के तिल और फूल चौकी पर छोड़ दिए जाते हैं और थोड़े से तिल जल के लोटे में डाल दिए जाते हैं। फिर गणेश जी और विष्णु जी की प्रेम भाव से आरती होती है और क्षमा याचना की जाती है।
Updated on:
24 Jun 2026 04:22 pm
Published on:
24 Jun 2026 04:07 pm
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