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Bhaum Pradosh Vrat : भौम प्रदोष व्रत पर बन रहे तीन शुभ योग, कल पूजा का यह है सही समय और मुहूर्त

Bhadrapad Bhaum Pradosh Vrat 2023 प्रदोष व्रत भगवान शिव की आराधना के प्रमुख व्रतों में से एक है। मान्यता है कि इस दिन की जाने वाली प्रदोष व्रत पूजा के समय भगवान शिव प्रसन्न होकर कैलाश पर्वत पर नृत्य करते हैं और प्रसन्न होकर भक्तों की सारी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। इस दिन ग्रह नक्षत्र कई शुभ योग भी बना रहे हैं, जिसके कारण यह व्रत विशेष हो गया है तो आइये जानते हैं भौम प्रदोष व्रत कब है और कौन से शुभ योग बन रहे हैं...
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Updated: 11 Sep 2023, 1:22 PM IST
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भौम प्रदोष व्रत भाद्रपद कृष्ण पक्ष 2023

क्या है भौम प्रदोष व्रत
बता दें कि हर महीने की त्रयोदशी तिथि भगवान शिव की पूजा के लिए समर्पित है, इस दिन महादेव की पूजा प्रदोषकाल में की जाती है यानी सूर्यास्त से 45 मिनट पहले और 45 मिनट बाद के समय में। जिसके कारण त्रयोदशी के व्रत को प्रदोष व्रत के नाम से जाना जाता है। इसी के साथ प्रदोष व्रत जिस दिन पड़ता है उसके नाम से इसे प्रदोष कहा जाता है, जैसे सोमवार के दिन प्रदोष पड़ता है तो सोम प्रदोष और मंगलवार को पड़ता है तो भौम प्रदोष। भाद्रपद कृष्ण पक्ष त्रयोदशी का व्रत मंगलवार को है। इसलिए यह व्रत भौम प्रदोष व्रत है।

भौम प्रदोष व्रत मुहूर्त
पंचांग के अनुसार भाद्रपद कृष्ण पक्ष त्रयोदशी तिथि 12 सितंबर मंगलवार को सुबह 3.22 बजे से शुरू हो रही है और यह तिथि 13 सितंबर सुबह 5.51 बजे संपन्न हो रही है। इसलिए प्रदोषकाल के नियम से यह व्रत भौम प्रदोष है। इस दिन प्रदोष व्रत पूजा का मुहूर्त शाम 6.16 बजे से 8.34 बजे तक है (अलग-अलग शहर में सूर्यास्त के समय से कुछ मिनट का अंतर हो सकता है)।

भौम प्रदोष पर शुभ योग
इस साल भाद्रपद कृष्ण पक्ष भौम प्रदोष व्रत विशेष है। इस दिन तीन विशेष योग शिव योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और बुधादित्य योग बन रहे हैं। इन योगों में किया हुआ कोई कार्य जरूर सफल होता है और शिवजी की पूजा को कई गुना अधिक पुण्यफल मिलता है। इस दिन बन रहे शिव योग में भगवान शिव की पूजा से महादेव आसानी से प्रसन्न हो जाते हैं। ज्योतिष के अनुसार इस समय बुधादित्य योग भी बना रहेगा।


शिव योगः सूर्योदय के समय से शुरू होकर 13 सितंबर को सुबह 4.42 बजे तक रहेगा
सर्वार्थ सिद्धि योगः 12 सितंबर को सुबह 5.44 बजे से 13 सितंबर 2.31 बजे तक

भौम प्रदोष व्रत का महत्व
भौम प्रदोष व्रत साधकों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। इस दिन पूजा से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होकर भक्त की सारी मनोकामना पूरी करते हैं। मृत्यु लोक में उसे सुख समृद्धि शांति मिलती है और मृत्यु के बाद शिव लोक की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही मंगलवार के स्वामी रुद्रावतार हनुमानजी हैं, इस दिन शिव पूजा से साधक को बजरंग बली की भी कृपा प्राप्त होती है। वे साधक की सभी समस्याओं का अंत करते हैं, उसकी आर्थिक तंगी भी दूर होती है और मंगल दोष का निवारण होता है।

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11 Sep 2023, 1:22 PM IST
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