भाद्रपद शुक्ल पक्ष पंचमी के दिन ऋषि पंचमी मनाई जाती है। वैसे तो स्त्री और पुरुष दोनों पाप निवृत्ति के लिए यह व्रत रखते हैं। लेकिन मान्यता है कि इस व्रत को रखने से महिलाओं से जुड़े दोष से उन्हें विशेष तौर पर मुक्ति मिल जाती है। यह व्रत 20 सितंबर को है। आइये जानते हैं क्या है वह दोष और ऋषि पंचमी व्रत का मुहूर्त और पूजा विधि क्या है?

कब है ऋषि पंचमी
पंचांग के अनुसार भाद्रपद शुक्ल पक्ष पंचमी की शुरुआत मंगलवार 19 सितंबर 2023 को शाम 5.13 बजे हो रही है और यह तिथि 20 सितंबर को शाम 5.46 बजे संपन्न हो रही है। इसलिए उदया तिथि में ऋषि पंचमी व्रत बुधवार 20 सितंबर को पड़ेगा। इस दिन ऋषि पञ्चमी पूजा मुहूर्त सुबह 10:44 बजे से दोपहर 01:11 बजे तक यानी 2 घंटे 27 मिनट का पूजा मुहूर्त है। कुछ पंचांग में पूजा मुहूर्त सुबह 11.19 बजे से 1.45 बजे तक बताया जा रहा है।
ऋषि पंचमी व्रत का महत्व
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार यह व्रत महिलाओं के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। ऐसा माना जाता है कि मासिक धर्म के दौरान रसोई या खाना बनाने से रजस्वला दोष लग सकता है। ऐसे में ऋषि पंचमी के व्रत द्वारा इस दोष से मुक्ति पाई जा सकती है। इसके अलावा ऋषि पंचमी के दिन गंगा स्नान करने से सभी प्रकार के पापों से मुक्ति मिलती है और सप्तऋषियों का आशीर्वाद मिलता है। इस दिन गंगा स्नान संभव नहीं है तो घर पर ही पानी में गंगाजल डालकर स्नान करना चाहिए।
ऋषि पंचमी व्रत पूजा विधि (Rishi Panchami puja vidhi)
1. ऋषि पंचमी व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान ध्यान से निवृत्त होकर घर और मंदिर की सफाई करें।
2. इस दिन रेशमी वस्त्र पहनकर पूजा करना अच्छा माना जाता है, और आंगन में बेदी बनाकर पूजा कर सकें तो बेहतर।
3. धूप, दीप, फल, फूल, घी, पंचामृत आदि पूजन सामग्री एकत्र कर एक चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाएं और चौकी पर सप्तऋषियों की तस्वीर रखें।
4. यहां गुरु की तस्वीर भी स्थापित कर सकते हैं। अब उन्हें पंचामृत से स्नान कराएं और शुद्ध वस्त्र से उनको सुखाएं।
5. फल-फूल, नैवेद्य आदि अर्पित करें, उनके सामने दीपक जलाएं।
6. चंदन, अगर और कपूर की गंध अर्पित करते हुए अपनी गलतियों के लिए क्षमा मांगें।
7. इसके बाद आरती करें और प्रसाद बांटें और बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लें।