धर्म और अध्यात्म

Garuda Purana : गरुड़ पुराण के अनुसार किन लोगों को अंतिम संस्कार में नहीं जाना चाहिए?

Garuda Purana funeral rules : गरुड़ पुराण के अनुसार गर्भवती महिलाएं, बच्चे, बीमार और सूतक में रहने वालों को अंतिम संस्कार में क्यों नहीं जाना चाहिए? जानिए पूरी मान्यता।

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Jan 20, 2026
Garuda Purana funeral rules : गरुड़ पुराण अंतिम संस्कार नियम

Who should not attend funeral as per Garuda Purana : गरुड़ पुराण के मुताबिक कुछ लोगों को अंतिम संस्कार या श्मशान घाट जाने से बचना चाहिए। सबसे पहले, गर्भवती महिलाएं, क्योंकि वहां का शोक, तनाव और निगेटिव माहौल उनके मन और गर्भ में पल रहे बच्चे पर असर डाल सकता है। छोटे बच्चों को भी नहीं ले जाना चाहिए, क्योंकि श्मशान का दृश्य, जलती चिता, और लोगों का रोना-धोना उनके मन में डर या मानसिक असंतुलन पैदा कर सकता है।

बीमार या बहुत कमजोर लोगों को भी श्मशान नहीं जाना चाहिए। वहां का भावनात्मक दबाव और तनाव उनकी सेहत और बिगाड़ देता है। अगर किसी के घर में सूतक चल रहा हो, तो भी उसे दूर रहना चाहिए मान्यता है कि सूतक के दौरान ऐसे धार्मिक कामों से दूर रहना जरूरी है।

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और हां, जो लोग बहुत ज्यादा दुखी या भावुक हैं, उन्हें भी अंतिम संस्कार में जाने से बचना चाहिए। कहते हैं, वहां पर जरूरत से ज्यादा रोना-बिलखना आत्मा की शांति में रुकावट डालता है।

गर्भवती महिलाएं

गरुड़ पुराण के अनुसार, गर्भवती महिलाओं को श्मशान घाट या अंतिम संस्कार में जाने की अनुमति नहीं है। अंतिम संस्कार का माहौल दुख और तनाव से भरा होता है, जो गर्भवती महिला के मन पर बुरा असर डाल सकता है। श्मशान घाट पर नकारात्मक ऊर्जाएं भी सक्रिय रहती हैं, जो अजन्मे बच्चे पर असर डाल सकती हैं।

छोटे बच्चे

छोटे बच्चों को भी श्मशान घाट या अंतिम संस्कार में जाने से मना किया जाता है। गरुड़ पुराण के अनुसार, श्मशान घाट, जलती हुई चिताओं और लोगों के रोने-धोने का दृश्य छोटे बच्चों में डर या चिंता पैदा कर सकता है। इसलिए, बच्चों को अंतिम संस्कार में ले जाना अनुचित माना जाता है।

बीमार लोग

बीमार और कमजोर दिल वाले लोगों को भी श्मशान घाट जाने या अंतिम संस्कार में शामिल होने से बचना चाहिए। गरुड़ पुराण के अनुसार, यह माहौल पहले से बीमार लोगों के लिए भारी पड़ सकता है। दुख और तनाव उनकी हालत को और खराब कर सकते हैं।

जिनके घर में मातम हो

गरुड़ पुराण के अनुसार, अगर किसी के घर में हाल ही में किसी की मृत्यु हुई है और मातम चल रहा है, तो दूसरे अंतिम संस्कार में शामिल होना वर्जित माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि शोक की अवधि के दौरान, धार्मिक गतिविधियों से दूर रहना चाहिए।

जो बहुत दुखी या भावुक हों

गरुड़ पुराण के अनुसार, अंतिम संस्कार आत्मा की शांति से जुड़ा होता है। इस समय मन का शांत और स्थिर रहना ज़रूरी है। इसलिए, ज़्यादा रोना आत्मा की शांति में बाधा डाल सकता है, इसलिए ऐसा करने वालों को इस रीति-रिवाज से दूर रहने की सलाह दी जाती है।

अस्वीकरण (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। यहाँ दी गई ज्योतिष, वास्तु या धार्मिक जानकारी मान्यताओं और विभिन्न स्रोतों पर आधारित है। हम इसकी पूर्ण सटीकता या सफलता की गारंटी नहीं देते हैं। किसी भी उपाय, सलाह या विधि को अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के प्रमाणित विशेषज्ञ या विद्वान से परामर्श अवश्य लें।

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Published on:
20 Jan 2026 06:53 pm
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