Sindoor Lagane Ka Tarika: हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एक विवाहित स्त्री के लिए सोलह श्रृंगार का बहुत महत्व होता है जिनमें से एक सिंदूर भी है। वहीं ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मान्यता है कि सिंदूर लगाने के नियमों की अनदेखी आपके जीवन में समस्याएं पैदा कर सकती है।
हिंदू धर्म में हर सुहागिन के लिए सिंदूर का बड़ा महत्व बताया गया है और लंबे समय से मांग में सिंदूर लगाने की परंपरा चली आ रही है। लेकिन आजकल के समय में फैशन के चक्कर में तरह-तरह से सिंदूर लगाने का चलन चल गया है। कुछ महिलाएं तो बस नाम के लिए सिंदूर की एक छोटी बिंदी या लकीर खींच लेती हैं। लेकिन ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यह तरीका बिल्कुल भी सही नहीं है क्योंकि इससे महिला के पति के जीवन पर नकारात्मक पड़ने के साथ ही घर की सुख-शांति भंग हो सकती है। तो आइए जानते हैं सिंदूर लगाते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए...
हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सुहागिनों को मांग के बीचो-बीच सिंदूर लगाना चाहिए। मान्यता है कि इससे आपके पति पर आने वाले संकट और अकाल मृत्यु का भय से मुक्ति मिलती है।
आजकल कई महिलाएं फैशन की दौड़ में खुद को आगे दिखाने के लिए एक दूसरे की देखा-देखी अपने बालों में सिंदूर तो लगाती हैं लेकिन अपने बालों से उस सिंदूर को छिपा लेती हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार माना जाता है कि मांग में सिंदूर छिपा लेने वाली स्त्री के पति के समाज में मान-सम्मान को हानि पहुंचती है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार किसी शादीशुदा स्त्री को किसी दूसरी महिला के सिंदूर को अपनी मांग में नहीं भरना चाहिए क्योंकि यह अशुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे महिला के पति को आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
कई बार महिलाएं नहाने और बाल धोने के तुरंत बाद अपने बालों में सिंदूर भर लेती हैं जो कि ज्योतिष शास्त्र की दृष्टि से बिल्कुल भी सही नहीं है। इससे आपके दांपत्य जीवन की सुख-शांति पर बहुत गलत असर पड़ सकता है। इसलिए सुहागिनों को नहाने और बाल धोने के कुछ समय बाद ही सिंदूर लगाना चाहिए।
(डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई सूचनाएं सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। patrika.com इनकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ की सलाह ले लें।)
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