
Diwali : दीपोत्सव के 5 दिनों में धन तेरस और रूप चौदस के बाद अब धार्मिक आस्था, पारंपरिक अनुष्ठानों और पारिवारिक रिश्तों से जुड़े पर्वों की बारी है। आज रविवार को घर-घर सुख, समृद्धि के लिए मां लक्ष्मी की पूजा होगी। दीपावली पर घरों को रोशन करने, रंगोली बनाने और सजावट करने का उत्साह हर तरफ दिखाई देता है। लेकिन त्योहार की खुशियों के बीच पर्यावरण का ध्यान रखना भी जरूरी है। पटाखों का धुआं, प्लास्टिक की सजावटी सामग्री, थर्मोकोल और एक बार इस्तेमाल होने वाली वस्तुएं त्योहार के बाद बड़ी मात्रा में कचरा पैदा करती हैं। ऐसे में छोटी-छोटी आदतें अपनाकर दीपावली को ज्यादा जिम्मेदार और पर्यावरण के अनुकूल बनाया जा सकता है। हकीकत तो यह है कि धन की देवी माता लक्ष्मीजी वहां स्थायी रूप से वास करती हैं जहां कचरा न हो, प्रदूषण न हो। स्वच्छ और शांत वातावरण उन्हें बहुत भाता है। कम कचरा, कम प्रदूषण, ज्यादा खुशियां देता है और इस पूजा से लक्ष्मीजी सबसे ज्यादा प्रसन्न होती हैं।
सजावट में अपनाएं प्राकृतिक विकल्प
घर की सजावट के लिए प्लास्टिक के फूलों और थर्मोकोल की जगह ताजे फूल, पत्तियां, आम के पत्तों के तोरण और कागज से बनी सजावटी वस्तुओं का इस्तेमाल किया जा सकता है। रंगोली के लिए फूलों की पंखुडिय़ां, चावल का आटा और प्राकृतिक रंग बेहतर विकल्प हैं। सजावट में ऐसी चीजें हो जिन्हें फिर से उपयोग कर सकें।
दीपावली पर उपहारों की पैकिंग, मिठाइयों के डिब्बे और सजावट की सामग्री से काफी कचरा निकलता है। प्लास्टिक की जगह कपड़े या कागज के थैलों का इस्तेमाल करें। गीले और सूखे कचरे को अलग रखें। फूलों और जैविक सामग्री को खाद बनाने में इस्तेमाल किया जा सकता है। इस तरह त्योहार की रौनक के साथ पर्यावरण की जिम्मेदारी भी निभाई जा सकती है।
पटाखों से निकलने वाला धुआं और तेज आवाज आसपास के वातावरण को प्रभावित करते हैं। ऐसे में रोशनी, संगीत और परिवार के साथ सामूहिक गतिविधियों के जरिए भी त्योहार का आनंद लिया जा सकता है। यदि पटाखे जलाने का विकल्प चुना जाता है, तो केवल अधिकृत विक्रेताओं से प्रमाणित ग्रीन पटाखे लें और स्थानीय प्रशासन के नियमों का पालन करें। ध्यान रखें कि ग्रीन पटाखे भी पूरी तरह प्रदूषण मुक्त नहीं होते।