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दिवाली पर क्यों खोले जाते हैं नए बहीखाते? कारोबार में चोपड़ा पूजन का महत्व

Diwali : चोपड़ा पूजन: नए कारोबारी साल की शुरुआत का अवसर, डिजिटल दौर में आज भी अधिकांश व्यापारी निभा रहे परंपरा
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भारत

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deepak deewan

•

Updated: 8 Nov 2026, 8:48 AM IST

दिवाली पर बही खातों की पूजा

दिवाली पर बही खातों की पूजा image AI

Diwali : देश-दुनिया में दीपोत्सव का उल्लास छाया हुआ है। धनतेरस और रूप चौदस के बाद अब धार्मिक आस्था, पारंपरिक अनुष्ठानों और पारिवारिक रिश्तों से जुड़े पर्वों की बारी है। रविवार को सुख, समृद्धि के लिए घर-घर मां लक्ष्मी की पूजा होगी। सोमवार को सोमवती अमावस्या पर स्नान-दान और भगवान शिव की आराधना होगी। इसके बाद गोवर्धन पूजा पर भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति और अन्नकूट के आयोजन होंगे। वहीं भाई दूज पर भाई-बहन के स्नेह और आत्मीयता की परंपरा निभाई जाएगी। मंदिरों और घरों में आज मुख्य पर्व दिवाली को लेकर तैयारियां की जा रही हैं। व्यापारियों के लिए केवल रोशनी और खुशियों का पर्व नहीं, बल्कि नए कारोबारी साल की शुरुआत का भी अवसर होता है। इस दिन घरों में मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा के साथ दुकानों और प्रतिष्ठानों में नए बहीखातों का पूजन किया जाता है। इसे चोपड़ा पूजन कहा जाता है।

व्यापारी नए खातों पर शुभ- लाभ, श्री गणेशाय नम: और स्वास्तिक बनाकर नए वित्तीय चक्र की शुरुआत करते हैं। चोपड़ा पूजन को केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि व्यापारिक जीवन में नए संकल्प लेने का अवसर माना जाता है। व्यापारी इस दिन बीते साल के कारोबार का आकलन करते हैं और आने वाले समय के लिए नई योजनाएं बनाते हैं।

पुराने बहीखातों में दर्ज लाभ-हानि और लेन-देन का लेखा- जोखा नए साल की रणनीति तैयार करने में मदद करता है। यही वजह है कि यह परंपरा आज भी व्यापारिक समुदाय में विशेष महत्व रखती है। नए बहीखाते की शुरुआत शुभ मुहूर्त में करने से कारोबार में बरकत और समृद्धि बनी रहती है।

क्या है चोपड़ा पूजन की परंपरा?

चोपड़ा का अर्थ बहीखाते या हिसाब-किताब की पुस्तिका से है। धर्माचार्य पंडित अरुण बुचके बताते हैं कि पुराने समय में व्यापारी सालभर के लेन-देन, उधारी, आमदनी और खर्च का हिसाब इन्हीं पुस्तकों में दर्ज करते थे। दीपावली पर पुराने खातों को बंद कर नए बहीखाते शुरू करने की परंपरा है। इस दिन व्यापारी अपनी दुकानों और प्रतिष्ठानों में लक्ष्मी-गणेश का पूजन करते हैं और नए खातों को तिलक लगाकर पूजा में रखते हैं।

अब कागजी बहीखातों की जगह ले रहे डिजिटल खाते

समय के साथ कारोबार का तरीका बदला है और हिसाब- किताब रखने की व्यवस्था भी डिजिटल होती जा रही है। पहले जहां व्यापारी लाल कपड़े में लिपटी बही और रजिस्टर की पूजा करते थे, वहीं अब कई कारोबारी कंप्यूटर, लैपटॉप और अकाउंटिंग सॉफ़्टवेयर के जरिए लेन-देन का रिकॉर्ड रखते हैं। हालांकि, डिजिटल दौर में भी चोपड़ा पूजन की परंपरा कायम है।