Astrology: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य का यह उपरत्न आपके जीवन में सफलता, प्रसिद्धि, धन, स्वास्थ्य और रिश्ते सभी से जुड़े सकारात्मक परिणाम दे सकता है।
आर्थिक तंगी, स्वास्थ्य और निजी जीवन से जुड़ी सभी समस्याओं को दूर करने के लिए वैदिक ग्रंथों में रत्नों को धारण करने से होने वाले लाभ को बताया गया है। ऐसे में ग्रह-नक्षत्रों के आधार पर सही रत्न धारण करने से लाभ होता है। लेकिन बहुत से रत्नों के कीमती होने के कारण हर कोई उन्हें नहीं पहन सकता। ऐसे में उपरत्न धारण करने से भी बेहतरीन परिणाम मिल सकते हैं। ज्योतिष शास्त्र में माणिक्य का उपरत्न गार्नेट भी काफी प्रभावी माना गया है। तो आइए जानते हैं इस गहरे लाल रंग के रत्न को पहनने से क्या-क्या फायदे होतें हैं और इसे कैसे धारण करना चाहिए...
गार्नेट रत्न कौन पहन सकता है: ज्योतिष शास्त्र की मानें तो जिस जातक की कुंडली में सूर्य कमजोर या नीच राशि में उपस्थित होता है, उसे गहरे लाल रंग का गार्नेट धारण करने की सलाह दी जाती है। क्योंकि गार्नेट रत्न धारण करने से कुंडली में सूर्य ग्रह को प्रबलता मिलती है।
कैसे धारण करें गार्नेट रत्न: विद्वानों के अनुसार गार्नेट रत्न को तांबे या सोने की धातु में जड़वाकर पहनना शुभ होता है। गार्नेट रत्न को शुक्ल पक्ष के रविवार के दिन धारण करना चाहिए। वहीं माणिक्य का यह उपरत्न धारण करने से पहले रविवार के दिन सुबह स्नान आदि करने के बाद इस रत्न को गाय के कच्चे दूध और गंगाजल के मिश्रण से शुद्ध करके पूजा-पाठ करने के बाद ही पहनें। आप गार्नेट रत्न को अपनी अनामिका अंगुली में धारण करें।
गार्नेट रत्न धारण करने के फायदे:
रत्न शास्त्र में सूर्य ग्रह से संबंधित रत्न माणिक्य है। जिसका उपरत्न गार्नेट भी एक प्रभावशाली रत्न है। गार्नेट को रक्तमणि या तामड़ा के अन्य नाम से भी जाना जाता है। गारमेंट रत्न को धारण करने से सूर्य ग्रह के अशुभ प्रभाव दूर होते हैं और व्यक्ति का भाग्योदय होता है।
इसके अलावा ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस रत्न को धारण करने वाले जातक के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और उसके आत्मविश्वास, यश, प्रसिद्धि, धन, सेहत सभी में बढ़ोतरी होती है। गारमेंट रत्न आंखों की रोशनी को बेहतर बनाने तथा शारीरिक और मानसिक समस्याओं को दूर करने में भी सहायक माना जाता है।
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