Relation Tips by Gaur Gopal Das: आज के दौर में रिश्तों में लड़ाई मुख्य समस्या है। इस आर्टिकल गौर गोपाल दास से समझिए, माडर्न रिलेशनशिप के नए जमाने के सॉल्यूशन।
Gaur Gopal Das on Relationship: धार्मिक वक्ता गौर गोपाल दास ने रिलेशनशिप पर गहरी बात समझाई है। वे स्मिता प्रकाश के साथ हाल ही, पोडकास्ट में शामिल हुए थे। इस दौरान उन्होंने मॉडर्न रिश्तों की लड़ाईयों के नए जमाने के सॉल्यूशन बताए। यदि उनकी बात को ध्यान से पढ़कर, जीवन में उतारा जाए तो, रिश्ते टूटने से बच सकते हैं। इस आर्टिकल में समझिए, लव लाइफ को बिखरने से बचाने के लिए क्या करें?
गौर गोपाल दास कहते हैं कि, आज के डिजिटल युग में, जहां हम स्वाइप राइट करके अपना साथी चुनते हैं, वहां एक नया संकट खड़ा हो गया है, वह है वैचारिक युद्ध। पहले माना जाता था कि, विपरीत स्वभाव और विचारधारा वाले लोग एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं, लेकिन इस पॉलिटिकल पोलराइजेशन के दौर में विपरीत राजनीतिक विचार, प्रेम की जड़ों को हिला रहे हैं। ऐसे में हमें मतभेद रखना चाहिए, पर मनभेद नहीं।
गोपाल दास ने कहा कि, सोशल मीडिया के दौर में, राजनीतिक पहचान को हम खुदकी पहचान मान लेते हैं। किसी नेता या पार्टी का समर्थन सिर्फ राय और विचारों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि लाइफस्टाइल चॉइस बन गया है। जब एक ही छत के नीचे रहने वाले पति-पत्नी या प्रेमी-प्रेमिका अलग-अलग विचारधाराओं का सपोर्ट करते हैं, तो भोजन की मेज बहस का मैदान बन जाती है। हाल के सर्वेक्षण बताते हैं कि, दुनिया भर में लोग अब ऐसे साथी को चुनना पसंद कर रहे हैं, जिनकी राजनीतिक सोच उनसे मेल खाती हो। यानी अब वैचारिक मतभेद, व्यावहारिक मनभेद में बदलने लगे हैं।
रिश्तों में खलल तब बढ़ती है, जब मतभेद, मनभेद में बदलने लगते हैं। रामायण और महाभारत जैसे ग्रंथ हमें यही सिखाते है कि, संवाद (Communication) हर समस्या का हल है। हनुमान जी ने रावण जैसे शत्रु के सामने भी अपना आपा नहीं खोया और उसके गुणों का सम्मान किया। अगर हम अपने साथी के विचारों से सहमत नहीं हैं, तो इसका मतलब यह नहीं कि, हम उनका सम्मान करना छोड दें। कुल मिलाकर यह समझना जरूरी है कि, बातचीत से मसले सुलझते हैं।
हमें ये समझना चाहिए कि, रिश्तों में अहिंसा केवल शारीरिक ही नहीं होती, बल्कि शब्दों से भी होती है। एक ही सत्य के कई पहलू होते हैं। एक व्यक्ति को जो अंक 9 दिख रहा है, वह दूसरे को 6 दिख सकता है। दोनों अपनी जगह सही हैं, बस उनका दृष्टिकोण अलग है। ऐसे में केवल खुद को ही सही और दूसरे को गलत नहीं समझना चाहिए।
सुनने की कला: जवाब देने के लिए नहीं, बल्कि सामने वाले को समझने के लिए सुनें।
इंसानियत सर्वोपरि: याद रखें कि पार्टी और विचारधारा अलग हो सकती है, लेकिन परिवार और साथी का साथ जरूरी है।
सम्मान का सीमा: असहमति को अपमान में न बदलें। Agree to Disagree (मतभेदों का सम्मान) के सिद्धांत को अपनाएं।
इतिहास गवाह है कि समाज तब बिखरता है, जब बातचीत खत्म हो जाती है। प्रेम किसी विचारधारा का मोहताज नहीं होना चाहिए। महान चिंतकों ने भी कहा है, इंसानियत से बड़ा कोई धर्म नहीं और सम्मान से बड़ा कोई रिश्ता नहीं। अपने रिश्तों को राजनीतिक बहसों की भेंट न चढ़ने दें। हर स्थिति में सम्मान बनाएं रखें। इससे आपके रिश्ते कभी नहीं बिखरेंगे।