चाहे जितनी खराब परिस्थितियां हों, ईश्वर के प्रति समर्पित रहना, निष्ठा रखना उनका कृपा पात्र बना सकता है, जैसे पिता के अत्याचारों ने भक्त प्रह्लाद को भगवान का दुलारा बना दिया। उसके लिए नर और सिंह का मिलाजुला रूप धारण करने के लिए भी तैयार हो गए। इसलिए होलाष्टक (Holashtak 2023) में भगवान की उपासना करनी चाहिए। इस अवधि में भगवान विष्णु और भगवान शिव की उपासना सभी समस्याओं से मुक्ति (Holashtak 2023 ke upay) दिलाती है। मान्यता है कि होलाष्टक के आठ दिनों में महामृत्युंजय मंत्र (Holashtak men kya karen) के जाप से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है।
होलाष्टक 2023 के उपायः होलाष्टक 2023 के ये उपाय (Holashtak Upay 2023) आपको कई समस्याओं से छुटकारा दिला सकते हैं।
1. शिवलिंग पर चढ़ाएं बेलपत्रः रोग से मुक्त होने के लिए होलाष्टक में जितनी आपकी उम्र है, उतने बेलपत्र लें, सभी बेलपत्र पर सफेद चंदन से राम-राम लिखें, उन्हें उल्टाकर शिवलिंग पर ऊँ नमः शिवाय मंत्र का जाप करते हुए चढ़ाएं।
2. स्वास्तिक या ऊँ का निशान : घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर करने के लिए होलाष्टक के दौरान हल्दी चावल पीसकर उसमें गंगाजल मिलाएं और घर के मुख्यद्वार पर स्वास्तिक या ऊँ का चिह्न बनाएं।
3. नारियल का उपायः घर में कोई बीमार चल रहा है तो जटा वाला नारियल लें और सात या ग्यारह बार उसे उल्टा उसके सिर से घुमाकर बहते पानी में प्रवाहित करें।
4. दानः व्यापार में किसी तरह के नुकसान से बचने के लिए होलाष्टक की अवधि में किसी मंदिर में जाकर एक सुपारी, पांच मोदक, पांच लाल गुड़हल के फूल भगवान गणेश को दाएं हाथ से अर्पित करें। मंदिर से लौटते वक्त किसी गरीब को पैसा, कपड़ा या अनाज दान करें।
5. शनिवार का होलाष्टक उपायः कार्य क्षेत्र में उतार-चढ़ाव का सामना कर रहे हैं तो होलाष्टक के दौरान पड़ रहे शनिवार को काला कपड़ा, काली उड़द की दाल, काला तिल, लोहे का सामान किसी जरूरतमंद को दान करें।
6. मिट्टी के दीये में कपूर जलाने का उपायः गृह क्लेश से छुटकारा पाने के लिए होलाष्टक में आठ दिनों तक शाम को एक मिट्टी के दीये में कपूर रखकर जलाकर पूरे घर में दिखाएं। इसके अलावा तुलसी के सामने देसी घी का दीया जलाएं।
महामृत्युंजय मंत्रः होलाष्टक में महामृत्युंजय मंत्र का जाप अकाल मृत्यु के खौफ को दिल से दूर करता है । यह मंत्र विशेष फल देने वाला है। यह मंत्र है ऊँ त्र्यंबकं यजामहे, सुगंधिंपुष्टिवर्धनम्
उर्वारुक्मिव बंधनात्, मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्।।