
Vivah Muhurat 2026: सोमवती अमावस्या पर 15 जून को होगा ज्येष्ठ अधिकमास का समापन, शुरू होंगे सभी मांगलिक कार्य (फोटो सोर्स : AI@chatgpt)
Vivah Muhurat 2026: ज्येष्ठ अधिकमास 15 जून को समाप्त हो रहा है, जिसके बाद विवाह सहित अन्य मांगलिक कार्य फिर शुरू हो जाएंगे। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार देवशयनी एकादशी (Devshayani Ekadashi 2026) (25 जुलाई) से पहले विवाह के लिए कुल 17 पंचांगीय मुहूर्त उपलब्ध रहेंगे। पहला सावा 19 जून को रहेगा, जबकि 12 जुलाई आखिरी पंचांगीय विवाह मुहूर्त होगा।
ज्योतिषाचार्य पंडित दामोदर प्रसाद शर्मा के अनुसार, इन 18 दिनों में से कुल 17 दिन शुद्ध पंचांगीय विवाह मुहूर्त उपलब्ध रहेंगे, जो इस सीजन को बेहद खास और मांगलिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण बनाते हैं। इसकी शुरुआत 19 जून को होने वाले पहले पंचांगीय सावे के साथ होगी। इसके बाद जुलाई के मध्य तक शहरों से लेकर गांवों तक उत्सव का माहौल रहेगा। 15 जुलाई से ही ग्रहों की बदलती चाल और 18 जुलाई को देवगुरु बृहस्पति का तारा अस्त होने के कारण सभी शुभ कार्यों पर धार्मिक रूप से स्वतः ही विराम लग जाएगा। ऐसे में 12 जुलाई को इस सीजन का आखिरी पंचांगीय सावा संपन्न होगा।
इस पूरे सीजन में सबसे बड़ी राहत और उत्सुकता 22 जुलाई को आने वाली 'भदल्या नवमी' को लेकर है। इस दिन को सनातन परंपरा में 'अबूझ सावा' माना गया है। अबूझ सावे का अर्थ है कि जिन जातकों के विवाह के लिए कोई व्यक्तिगत या शुद्ध मुहूर्त नहीं निकल पा रहा है, वे भी इस दिन बिना किसी संकोच के फेरे ले सकते हैं। यही वजह है कि मैरिज गार्डनों और पंडितों के पास भदल्या नवमी के लिए सबसे ज्यादा एडवांस बुकिंग दर्ज की जा रही है।
खगोलीय और ज्योतिषीय गणना के अनुसार, सूर्य और चंद्रमा के चक्र के बीच तालमेल बिठाने के लिए हर तीन साल में एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है, जिसे 'अधिकमास' या 'मलमास' कहा जाता है। इस दौरान सूर्य की संक्रांति (राशि परिवर्तन) न होने के कारण इसे मांगलिक कार्यों के लिए वर्जित माना जाता है, परंतु यह समय जप, तप और दान-पुण्य के लिए सर्वोत्तम है।
वहीं दूसरी ओर, 25 जुलाई को देवशयन के बाद 'चातुर्मास' शुरू हो जाएगा, जो सीधा 20 नवंबर को देवउठनी एकादशी पर समाप्त होगा। इन चार महीनों में भगवान विष्णु के निद्रालीन रहने के कारण विवाह पूरी तरह वर्जित रहेंगे, जिससे नवंबर-दिसंबर के शीतकालीन सीजन में फिर से शादियों की धूम देखने को मिलेगी। व्यापारियों के अनुसार, शादियों के इस छोटे सीजन में सोने और चांदी के आभूषणों के साथ-साथ पारंपरिक राजस्थानी पोशाकों (जैसे लहरिया और गोटा-पत्ती साड़ियों) की मांग में 40% तक की बढ़ोतरी देखी जा रही है।
प्रथम सावा: 19 जून
अन्य शुभ तारीखें: 20, 22, 23, 24, 26, 27 और 29 जून।
(नोट: 26 और 27 जून को वीकेंड होने के कारण कामकाजी परिवारों के लिए विशेष सुविधा रहेगी।)
शुभ तारीखें: 1, 3, 4, 6, 7, 8, 9, 11 और 12 जुलाई।
आखिरी पंचांगीय सावा: 12 जुलाई
अबूझ सावा (भदल्या नवमी): 22 जुलाई
चातुर्मास की समाप्ति के बाद साल के अंत में शहनाइयां इन तारीखों पर लौटेंगी:
नवंबर: 21, 24, 25 एवं 26 नवंबर (चार दिन)
दिसंबर: 2, 3, 4, 5, 11 एवं 12 दिसंबर (छह दिन)
ज्योतिष शास्त्र में देवगुरु बृहस्पति को कन्या के विवाह का और शुक्र को पुरुष के विवाह का मुख्य कारक माना जाता है। 18 जुलाई को गुरु तारा अस्त होने से पहले ही प्रकृति की शुभ ऊर्जाएं सिमटने लगती हैं, इसलिए बुद्धिजीवियों और पंडितों की सलाह है कि 12 जुलाई तक ही बड़े आयोजन संपन्न कर लिए जाएं।
एक महीने के सूखे के बाद बाजारों में अचानक भारी उछाल आया है। जयपुर के जौहरी बाजार, बापू बाजार और नेहरू बाजार में कपड़े, गहने और फुटवियर की दुकानों पर खरीदारों की भारी भीड़ उमड़ रही है। ऑल वेडिंग इंडस्ट्रीज फेडरेशन के महामंत्री भवानी शंकर माली ने बताया, "मैरिज गार्डन, कैटरिंग सर्विसेस और फ्लावर डेकोरेशन संचालकों ने अपनी कमर कस ली है। इस 18 दिनों के सीजन में अकेले राजस्थान भर में अरबों रुपये के टर्नओवर की उम्मीद है। विवाह स्थलों को तैयार किया जा रहा है।
Updated on:
09 Jun 2026 11:35 am
Published on:
09 Jun 2026 11:30 am
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